प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Administrative Reforms India News: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों की पदस्थापना और तबादलों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, नियमबद्ध और संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत सरकार ने आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदस्थापना के संबंध में सिफारिशें करने के लिए सिविल सेवा बोर्ड का गठन किया है।
इस संबंध में सोमवार को सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा एक सरकारी आदेश (गवर्नमेंट रेज़ोल्यूशन जीआर) जारी किया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह सिविल सेवा बोर्ड केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा 28 जनवरी, 2014 को जारी अधिसूचना तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) संशोधन नियम, 2014 के प्रावधानों के अनुरूप गठित किया गया है।
सरकारी आदेश के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव इस सिविल सेवा बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। वहीं, बोर्ड के सदस्यों में राज्य के वरिष्ठतम अतिरिक्त मुख्य सचिव को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष, वित्त आयुक्त अथवा समकक्ष रैंक और वेतन स्तर के अधिकारी भी बोर्ड के सदस्य के रूप में नामित किए जा सकते हैं।
आदेश में यह भी कहा गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग में कार्यरत अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव (कार्मिक) सिविल सेवा बोर्ड के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इसके साथ ही मंत्रालय के किसी भी मंत्रिस्तरीय प्रशासनिक विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत सबसे वरिष्ठ अधिकारी को भी सिविल सेवा बोर्ड का सदस्य नामित किया जाएगा।
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| पद | अधिकारी |
| अध्यक्ष (Chairman) | मुख्य सचिव (Chief Secretary) |
| सदस्य (Member) | वरिष्ठतम अतिरिक्त मुख्य सचिव |
| सदस्य (Member) | राजस्व बोर्ड अध्यक्ष / वित्त आयुक्त (समकक्ष) |
| सदस्य सचिव (Member Secretary) | सचिव (कार्मिक), सामान्य प्रशासन विभाग |
सरकार का मानना है कि सिविल सेवा बोर्ड के गठन से आईएएस अधिकारियों के तबादलों और पदस्थापनाओं में मनमानी पर रोक लगेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित, निष्पक्ष एवं नियमों के अनुरूप होगी। इससे प्रशासनिक स्थिरता बढ़ेगी और अधिकारियों को बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के कार्य करने का अवसर मिलेगा।
प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को केंद्र सरकार की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की भावना के अनुरूप माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पहल से राज्य में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को मजबूती मिलेगी और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।