‘जिला प्रमुख हटाओ, शिवसेना बचाओ’: लातूर में एकनाथ शिंदे गुट के भीतर बगावत, आपस में भिड़े कार्यकर्ता
Latur Shiv Sena Conflict: लातूर में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं ने जिला प्रमुख शिवाजी माने के खिलाफ मोर्चा खोला। बैठक में जमकर हंगामा और नारेबाजी हुई है। शिंदे गुट का मतभेद सामने आया
- Written By: अनिल सिंह
Latur Shiv Sena Shinde Group Chaos (फोटो क्रेडिट-X)
Latur Shiv Sena Shinde Group Chaos: महाराष्ट्र के लातूर जिले में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के भीतर जबरदस्त आंतरिक गुटबाजी और तनाव खुलकर सामने आ गया है। निलंगा शहर के टाउन हॉल में आयोजित पार्टी की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। यह सारा हंगामा विधायक और संपर्क प्रमुख मंगेश कुडालकर की मौजूदगी में हुआ, जिससे पार्टी की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विवाद की मुख्य वजह वर्तमान जिला प्रमुख शिवाजी माने के कामकाज को लेकर कार्यकर्ताओं में व्याप्त असंतोष बताया जा रहा है।
बैठक में ‘जिला प्रमुख हटाओ’ के नारे
जैसे ही बैठक शुरू हुई, शिवाजी माने के विरोधी गुट के कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अपना लिया। हॉल के भीतर “जिला प्रमुख को हटाओ, शिवसेना बचाओ” के नारे गूंजने लगे। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्तमान जिला नेतृत्व संगठन को मजबूत करने के बजाय तानाशाही रवैया अपना रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर शिवसैनिकों में नाराजगी है। नारेबाजी इतनी तेज थी कि कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा और देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई।
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संपर्क प्रमुख के सामने ही हंगामा
विधायक मंगेश कुडालकर, जो संगठन की मजबूती का जायजा लेने लातूर पहुंचे थे, के सामने ही इस तरह की घटना होना शिंदे गुट के लिए चिंता का विषय है। कुडालकर और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्यकर्ताओं को शांत करने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। अंततः, स्थिति नियंत्रण में तो आई, लेकिन इस हंगामे ने यह साबित कर दिया कि जिले में पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
शिंदे समूह के लिए बढ़ी चुनौती
आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लातूर जैसे महत्वपूर्ण जिले में इस तरह का बिखराव शिवसेना (शिंदे गुट) के लिए भारी पड़ सकता है। नाराज कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि यदि जिला नेतृत्व में बदलाव नहीं किया गया, तो पार्टी का आधार खिसक सकता है। फिलहाल, वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस घटना की रिपोर्ट उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भेजने का आश्वासन दिया है, लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
