Maharashtra: लातूर में कांग्रेस की वापसी, अमित देशमुख के नेतृत्व में 43 सीटों पर जीत
Maharashtra Local Body Elections: लातूर महानगरपालिका चुनाव 2026 में कांग्रेस ने 43 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। अमित देशमुख के नेतृत्व में पार्टी ने भाजपा की बढ़त पर निर्णायक रोक लगाई।
- Written By: अपूर्वा नायक
अमित देशमुख (सौ. सोशल मीडिया )
Latur News In Hindi: लातूर में कांग्रेस के पूर्व मंत्री और विधायक अमित देशमुख ने भाजपा को मात देते हुए 43 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने मराठवाड़ा में भाजपा की तेज रफ्तार को लातूर में 22 सीटों पर ही रोक दिया।
कांग्रेस ने यहां वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा, दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस गुट और शिवसेना ने अलग-अलग दम पर चुनावी मैदान में उतरना पसंद किया। भाजपा की कमान पूर्व मंत्री संभाजी पाटील-निलंगेकर और अर्चना पाटिल चाकूरकर के हाथों में थी।
यहां पुराने कांग्रेसी नेताओं ने ही भाजपा का किला भेदने की कोशिश की, लेकिन वे पार्टी को जीत दिलाने में नाकाम रहे। कांग्रेस ने आधे से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
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चुनावी प्रचार के दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष द्वारा विलासराव देशमुख को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को भी भाजपा की हार के संभावित कारणों में से एक माना जा रहा है। इसके अलावा, संभाजी पाटिल-निलंगेकर द्वारा और अधिक संयम बरतने की जरूरत थी, ऐसा भी राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है। लातूर में मराठा, लिंगायत और मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव काफी है।
लातूर का संदेशः विरासत अभी जिंदा है
लंबे समय तक लातूर की राजनीति पर कांग्रेस और दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की विरासत का दबदबा रहा है। 2017 में जरूर भाजपा ने 36 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी और कांग्रेस 33 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी महज एक सीट पर रह गई थी।
उस नतीजे की कांग्रेस के गढ़ में भाजपा की बड़ी संघ के रूप में देखा गया था, लेकिन 2026 के परिणाम और लातूर के मतदाताओं ने एक बार फिर कांग्रेस की ओर झुकाव दिखाया है। इसे कई राजनीतिक विश्लेषक भाजपा नेतृत्व के उस पुराने बयान के संदर्भ में देख रहे है, जिसने भावनात्मक रूप से कांग्रेस समर्थकों को एकजुट करने का काम किया।
2017 की हार का राजनीतिक जवाब यह जीत कांग्रेस के लिए 2017 की हार का सशक्त जवाब है। लातूर के मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्ता परिवर्तन स्थायी नहीं होता, यदि स्थानीय भरोसा और संवेदनशीलता को नजरअंदाज किया जाए।
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जीत के मायने
लातूर महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस की यह जीत सिर्फ सीटों का आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकेत है। पूर्व मंत्री और विधायक अमित देशमुख के नेतृत्व में मिली इस सफलता ने मराठवाड़ा की सियासत में कई संदेश साफ तौर पर दे दिए हैं।
- विरासत बनाम प्रयोग की जीत: यह परिणाम बताता है कि लातूर में विलासराव देशमुख की राजनीतिक विरासत आज भी जीवित है। 2017 में भाजपा की जीत को कांग्रेस के गढ़ में बड़ी संघ माना गया था, लेकिन 2026 में मतदाताओं ने उस प्रयोग को सीमित करते हुए फिर से परिचित नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
- अमित देशमुख का मजबूत नेतृत्व : 32 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत दिलाकर अमित देशमुख ने खुद को न सिर्फ लातूर बल्कि मराठवाड़ा में कांग्रेस के सबसे मजबूत चेहरों में शामिल कर लिया है। भाजपा की तेज रफ्तार को 20 सीटों पर रोकना उनके सांगठनिक कौशल और जमीनी पकड़ को दर्शाता है।
- गठबंधन की राजनीति सफल कांग्रेस वंचित बहुजन आघाड़ी का गठबंधन इस चुनाव में कारगर साबित हुआ। बिखरे विपक्ष के मुकाबले संयोजित रणनीति ने कांग्रेस को बढ़त दिलाई, जबकि भाजपा, दोनों राष्ट्रवादी गुट और शिवसेना का अलग-अलग लड़ना नुकसानदेह रहा।
- सामाजिक समीकरणों की अहमियत: मराठा, लिंगायत, मुस्लिम और दलित मतदाताओं के समीकरण को साधने में कांग्रेस सफल रही। भाजपा इन वर्गों को एकसाथ जोड़ने में चूक गई, जिसका सीधा असर नतीजों पर पड़ा।
- बयानबाजी का उल्टा असर : चुनावी प्रचार के दौरान विलासराव देशमुख को लेकर की गई टिप्पणी को मतदाताओं ने भावनात्मक मुद्दे के रूप में लिया, यह बयान कांग्रेस समर्थकों को एकजुट करने वाला फैक्टर बन गया।
