नागपुर में ‘वंचित’ की असली परीक्षा, भाजपा की ‘बी टीम’ या स्वतंत्र राजनीतिक प्रयोग?

Vanchit Bahujan Aghadi: नागपुर महानगरपालिका चुनाव में वंचित बहुजन आघाड़ी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि वह स्वतंत्र वैकल्पिक राजनीति कर रही है या भाजपा की ‘बी टीम’ के रूप में काम कर रही है।
Vanchit Bahujan Aghadi
Vanchit Bahujan Aghadi:नागपुर महानगरपालिका चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nagpur Municipal Election: नागपुर महानगरपालिका चुनाव इस बार केवल पार्षदों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह विभिन्न राजनीतिक दलों की वास्तविक भूमिका और राजनीतिक मंशा की भी परीक्षा बन गए हैं। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले नागपुर में कांग्रेस, दोनों शिवसेनाएं, दोनों राष्ट्रवादी दल, बसपा के साथ-साथ प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाड़ी भी पूरी ताकत से मैदान में उतरी है।

हर चुनाव की तरह इस बार भी वंचित को लेकर एक अहम सवाल खड़ा हो रहा है। क्या वंचित वास्तव में वैकल्पिक राजनीति का प्रतिनिधित्व कर रही है या फिर वह भाजपा की ‘बी टीम’ की भूमिका निभा रही है? खास बात यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय वाले नागपुर में प्रचार के दौरान वंचित का आक्रामक एंटी-आरएसएस रुख अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दे रहा है, जबकि भाजपा पर सीधी आलोचना जरूर जारी है।

गठबंधन की कोशिशें ठप

पिछले चुनावी अनुभवों को देखते हुए भी यह संदेह और गहराया है। मुंबई में कांग्रेस के साथ अधूरी आघाड़ी, ऐन वक्त पर उम्मीदवार न उतारने और अंतिम समय में रणनीति बदलने जैसे घटनाक्रमों के कारण वंचित की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठते रहे हैं। नागपुर में भी कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन की चर्चा के बीच वंचित के एक उम्मीदवार द्वारा कांग्रेस पर भाजपा से जुड़े होने का आरोप लगाए जाने के बाद गठबंधन की कोशिशें ठप हो गईं।

भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की स्थिति से भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा हो सकता है, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलने की संभावना है। हालांकि, दलित-बहुजन मतदाता कुछ वार्डों में वंचित को मजबूती दे सकते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये मत सत्ता को सीधी चुनौती देंगे या केवल चुनावी समीकरण बिगाड़ने तक सीमित रहेंगे।

वंचित बहुजन आघाड़ी के सत्ता में आने की संभावना फिलहाल कमजोर मानी जा रही है, लेकिन वह ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा पाएगी या नहीं, यह पूरी तरह चुनाव परिणामों पर निर्भर करेगा। नागपुर का जनादेश ही तय करेगा कि मतदाता ‘भाजपा की बी टीम’ के आरोपों को खारिज करते हैं या उन्हें स्वीकार करते हैं।

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