वर्धा में लाड़ली बहन योजना पर संकट, पोर्टल समस्या से लाभार्थी परेशान हैं।
Wardha News: वर्धा में मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना का पोर्टल तकनीकी खामी से ठप है। गलत ई-केवाईसी बताकर पात्र महिलाएं अपात्र हो रही हैं। डीबीटी रुकी, अधिकारी-लाभार्थी दोनों परेशान हैं।
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Wardha Women and Child Development News: वर्धा विस चुनाव से पहले सरकार की ओर से ‘लाडली बहन’ योजना की घोषणा कर लाभार्थियों के बैंक खातों में अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से जमा करना शुरू किया गया,लेकिन फिलहाल इस योजना के आधिकारिक पोर्टल ने ‘लाड़ली बहनों’ का साथ छोड़ दिया है। पोर्टल पर आ रही तकनीकी समस्याओं के कारण स्थानीय अधिकारी भी बेबस हो गए हैं। गलत ई-केवाईसी का हवाला देकर बड़ी संख्या में लाभार्थियों को योजना के लिए अपात्र ठहराने का सिलसिला शुरू हो गया है।
राज्य की महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाने, उनके स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करने तथा परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य में ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़ली बहन’ योजना 28 जून 2024 को शुरू की गई। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये डीबीटी के जरिए दिए जा रहे हैं। कुछ समय पहले लाभार्थियों को ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए थे।
कई महिलाओं ने रात-रात जागकर ई-केवाईसी भी पूरी की लेकिन अब गलत ई-केवाईसी का कारण बताकर पात्र लाभार्थी महिलाओं को भी योजना से बाहर किया जा रहा है। जिन लाभार्थियों के बैंक खातों में राशि जमा नहीं हुई है, वे महिला एवं बाल विकास विभाग में जाकर पूछताछ कर रही हैं। हालांकि, वहां कार्यरत अधिकारियों को पोर्टल पर जानकारी जांच ने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे भी फिलहाल परेशान हैं।
सम्बंधित ख़बरें
वर्धा में ट्रांसफर के बदले 20 हजार की रिश्वत मांगने वाला रापनि का सीनियर क्लर्क एसीबी के हत्थे चढ़ा
वर्धा में बकरीद पर शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की बैठक; नियमों के पालन की अपील
वर्धा में मानसून से पहले 29 लाख की लागत से साफ होंगे शहर के नाले, जलभराव रोकने के लिए 40 कर्मियों की टीम तैनात
बोर टाइगर प्रोजेक्ट के दैत्यगढ़ में भीषण आग से 34.89 हेक्टेयर वन क्षेत्र स्वाहा; दुर्लभ वन संपदा खाक
- ‘लाड़ली बहन’ योजना के लाभ के लिए करीब 3 लाख 20 हजार 491 महिलाओं ने पंजीयन कराया था। दिसंबर के अंत तक इनमें से 2 लाख 85 हजार 111 महिलाओं को योजना के लिए पात्र ठहराया गया।
- लेकिन फिलहाल गलत ई-केवाईसी का कारण बताकर लाभार्थियों को अपात्र करने का सिलसिला जारी है। पिछले 14 दिनों में कितनी लाभार्थियों को अपात्र ठहराया गया, इसकी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होने से स्थानीय अधिकारियों के पास भी विस्तृत जानकारी नहीं है।
यह भी पढ़ें: वर्धा जिले को 281 करोड के प्रारूप को मंजूरी, 2025-26 में 412 करोड का बजट, खर्च की रफ्तार बढाने पर जोर
280 महिलाओं ने लिया नाम वापस
- विभिन्न कारणों का हवाला देकर अब तक जिले की कुल 280 महिलाओं ने ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहन’ योजना का लाभ नहीं लेने की बात कहते हुए योजना से नाम वापस ले लिया है।
- इसका विधिवत पंजीयन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई है।
