संजय गायकवाड के खिलाफ कोल्हापुर में हंगामा, विधायक के पुतले को मारे जूते; प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प
Sanjay Gaikwad Controversy: बुलढाणा से शिवसेना विधायक संजय गायकवाड द्वारा 'शिवाजी कोण होता' के प्रकाशक प्रशांत आंबी को धमकी देने के बाद कोल्हापुर में बवाल। विपक्षी पार्टियों ने प्रदर्शन किया।
- Written By: आकाश मसने
विधायक संयज गायकवाड के प्रतीकात्मक पुतले को जूते मारते इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ता (सोर्स: सोशल मीडिया)
Kolhapur Protest Against Sanjay Gaikwad: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग ने हिंसक और उग्र प्रदर्शन का रूप ले लिया है। बुलढाणा से शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन पर ‘शिवाजी कोण होता’ (शिवाजी कौन थे) पुस्तक के प्रकाशक प्रशांत आंबी को भद्दी गालियां देने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है।
ऑडियो वायरल होने के बाद बढ़ा आक्रोश
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल हो रही है, जिसमें विधायक गायकवाड को प्रकाशक प्रशांत आंबी के साथ बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग करते और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते सुना जा सकता है। इस ऑडियो के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
कोल्हापुर में ‘जूते मारो’ आंदोलन
विधायक संजय गायकवाड के इस व्यवहार के विरोध में आज कोल्हापुर के ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विधायक गायकवाड के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके प्रतीकात्मक पुतले पर जूते मारो आंदोलन किया।
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पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प
कोल्हापुर में विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब कार्यकर्ताओं ने विधायक संजय गायकवाड का पुतला फूंकने की कोशिश की। मौके पर तैनात पुलिस बल ने सुरक्षा कारणों से पुतला दहन को रोकने का प्रयास किया, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक खींचातानी और झड़प हुई। अंततः पुलिस ने बल प्रयोग कर पुतले को अपने कब्जे में ले लिया।
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विधायक पद रद्द करने की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की गुंडागर्दी और भाषा का प्रयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि संजय गायकवाड के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और उनकी विधायक के रूप में सदस्यता रद्द की जाए। साथ ही प्रकाशक प्रशांत आंबी को सुरक्षा प्रदान की जाए।
