इतिहासकार डॉ. जयसिंगराव पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Historian Dr. Jaysingrao Pawar Passes Away: महाराष्ट्र के बौद्धिक और ऐतिहासिक जगत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। प्रख्यात इतिहासकार और शोधकर्ता डॉ. जयसिंगराव पवार का गुरुवार को पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे और पिछले एक महीने से फेफड़ों से संबंधित गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे।
डॉ. जयसिंगराव पवार मात्र एक शिक्षक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक शोध के क्षेत्र में एक संस्थान के समान थे। उन्होंने मराठा साम्राज्य के इतिहास, छत्रपति शिवाजी महाराज और राजर्षि शाहू महाराज के जीवन मूल्यों और उनके प्रशासन को जनमानस तक पहुंचाने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनकी मृत्यु को ऐतिहासिक अनुसंधान और मराठा इतिहास के क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने डॉ. पवार के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा, “डॉ. पवार के निधन से महाराष्ट्र ने ऐतिहासिक शोध के क्षेत्र में एक ‘सिद्धांतवादी मार्गदर्शक’ खो दिया है। सामाजिक चेतना के साथ इतिहास लिखने की उनकी कला अद्वितीय थी।”
डॉ. जयसिंगराव पवार ने तीन दशकों से अधिक समय तक कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए 20 से अधिक पाठ्यपुस्तकें लिखीं। शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर के इतिहास विभाग में ऐतिहासिक दस्तावेजों पर शोध करने का उनका अनुभव अद्वितीय था। वे अखिल महाराष्ट्र इतिहास परिषद के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और उन्होंने तीन वर्षों तक इसके अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
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उनके द्वारा लिखित पुस्तकें आज भी शोधकर्ताओं के लिए संदर्भ ग्रंथ (Reference Books) का काम करती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘महारानी ताराबाई’, ‘सेनापति संताजी घोरपड़े’, ‘मराठेशाहीचा मागोवा’ और ‘राजर्षि शाहू स्मारक ग्रंथ’ शामिल हैं। वर्ष 1992 में उन्होंने महाराष्ट्र इतिहास प्रबोधिनी की स्थापना की, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इतिहास का संरक्षण करना था। वे शिवाजी विश्वविद्यालय में राजर्षि शाहू अनुसंधान केंद्र के निदेशक भी रहे।