

कोल्हापुर जिला दुग्ध उत्पादक संघ के चुनाव में महायुति को हार का सामना करना पड़ा।
पाटील ने अपने बालों और निजी मामलों को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि आलोचनाओं के बावजूद वे सार्वजनिक जीवन में अपनी गतिविधियां जारी रखेंगे।
Social Media Trolling After Gokul Election: चुनाव में जीत का दावा करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन अपेक्षित नतीजे नहीं आने पर किसी नेता को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना कितना उचित है?
राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने यह सवाल उठाते हुए चुनावी दावों और नतीजों के बाद होने वाली ट्रोलिंग पर नाराजगी जताई। कोल्हापुर जिला दुग्ध उत्पादक संघ (गोकुल) के चुनाव में महायुति को हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद चंद्रकांत पाटील को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया। शुक्रवार को पुणे में स्नातक और शिक्षक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में मतदान करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
पाटील ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के नतीजों का अनुमान लगाना आसान नहीं है। चुनाव के दौरान सभी दल और नेता अपनी जीत का दावा करते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी चुनाव में जीत का भरोसा जताते हैं। ऐसे में केवल अपेक्षित नतीजे नहीं आने के कारण किसी को ट्रोल करना कहां तक सही है, यह विचार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि उनके हर बयान का मजाक बनाया जाता है और उनकी बातों का अलग अर्थ निकाला जाता है। कभी उनके बालों तो कभी व्यक्तिगत मामलों को लेकर टिप्पणियां की जाती हैं। सार्वजनिक जीवन में किसी के बयान या काम की आलोचना करने के बजाय व्यक्तिगत स्तर पर निशाना बनाना उचित नहीं है।
पाटील ने अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि एक मिल मजदूर का बेटा राज्य की राजनीति में इतने बड़े पद तक पहुंचा है, यह कई लोगों को बर्दाश्त नहीं होता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी गतिविधियों और बयानों पर नजर रखी जाती है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी आलोचनाओं से वे डरने वाले नहीं हैं। पाटील के बयान से चुनावी हार के बाद सोशल मीडिया पर नेताओं को निशाना बनाने और राजनीतिक दावों के आधार पर ट्रोलिंग करने की प्रवृत्ति पर बहस छिड़ने की संभावना है।
- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट