Water Crisis: कहीं पानी के लिए इंतजार, तो कहीं सड़क पर बर्बादी, छत्रपती संभाजीनगर में मरम्मत के दौरान बहा पानी

Water Wastage In Chhatrapati Sambhajinagar: जाधववाड़ी सिग्नल के पास मुख्य जलवाहिनी के वाल्व की मरम्मत के दौरान पानी सड़क पर बहने लगा। घटना से पानी की बर्बादी रोकने की व्यवस्था पर सवाल उठे।
Water Wastage During Pipeline Repair Chhatrapati Sambhajinagar
सड़क पर बहता पानी(सोर्स: AI)
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Highlights

  • 22 अक्टूबर की शाम नई जलापूर्ति योजना की मुख्य जलवाहिनी के वाल्व की मरम्मत के दौरान पानी सड़क पर बहा।

  • जलापूर्ति पूरी होने के बाद वाल्व निकालते समय अधिक दबाव के कारण पानी तेजी से बाहर निकला।

  • जलवाहिनी का पानी खाली होने के बाद मरम्मत जारी रखी गई। सड़क पर बहे पानी की आधिकारिक मात्रा सामने नहीं आई है।

Water Wastage During Pipeline Repair: छत्रपति संभाजीनगर के कई इलाकों में नागरिक पानी की आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जलवाहिनी की मरम्मत के दौरान हजारों लीटर पानी सड़क पर बह गया।

गुरुवार, 22 अक्टूबर की शाम जाधववाड़ी सिग्नल के पास नई जलापूर्ति योजना की मुख्य जलवाहिनी के वाल्व की मरम्मत करते समय अचानक पानी का तेज बहाव सड़क पर आ गया।

देखते ही देखते सड़क पर पानी जमा हो गया। इसके कारण वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर में पानी बचाने की अपील के बीच हुई इस घटना ने मरम्मत कार्य की योजना और पानी के अपव्यय को रोकने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वाल्व खोलते ही सड़क पर बहने लगा पानी

जाधववाडी क्षेत्र में जलापूर्ति पूरी होने के बाद 1,500 मिलीमीटर व्यास वाली मुख्य जलवाहिनी के वाल्व की मरम्मत का काम जीवीपीआर कंपनी के कर्मचारियों ने शुरू किया था। जलवाहिनी में पानी का दबाव अधिक होने के कारण वाल्व निकालते ही भीतर जमा पानी तेजी से बाहर निकलने लगा। इसके चलते बड़ी मात्रा में पानी सड़क पर बह गया।

कुछ ही समय में सड़क पर पानी जमा हो गया। इससे वाहन चालकों को आवागमन में कठिनाई हुई, जबकि पैदल चलने वाले नागरिकों को भी पानी से होकर रास्ता तय करना पड़ा। जिस पानी को नागरिकों तक पहुंचना चाहिए, उसका इस तरह सड़क पर बहना चर्चा का विषय बन गया।

पानी खाली होने के बाद मरम्मत

महानगरपालिका के जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता डी. पी. गायकवाड़ के अनुसार, जलवाहिनी का पानी पूरी तरह खाली होने के बाद जीवीपीआर कंपनी ने वाल्व की मरम्मत का काम जारी रखा। मरम्मत के कारण संबंधित समय में इस जलवाहिनी से नागरिकों को पानी की आपूर्ति नहीं की जा सकी।

हालांकि, मरम्मत के दौरान सड़क पर कितना पानी बहा, इसकी आधिकारिक मात्रा सामने नहीं आई है। लेकिन घटनास्थल पर पानी जमा होने से जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव और मरम्मत के समय पानी को नियंत्रित करने की आवश्यकता स्पष्ट हुई है।

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पानी बचाने के दावों पर उठे सवाल

शहर में पानी की बचत करने और जल वाहिनियों में रिसाव रोकने के लिए नागरिकों से लगातार सहयोग की अपील की जाती है। दूसरी ओर, मरम्मत के दौरान बड़ी मात्रा में पानी सड़क पर बहने की घटनाएं इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती हैं।

कई इलाकों में नागरिकों को पर्याप्त पानी के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ऐसे में उपलब्ध पानी का इस तरह बहना लोगों को खटक रहा है। नागरिकों का मानना है कि जल वाहिनियों की मरम्मत से पहले पानी के दबाव, वाल्व की स्थिति और निकासी की व्यवस्था का उचित आकलन किया जाना चाहिए।

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मरम्मत के साथ पानी की बचत भी जरूरी

जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए समय-समय पर मरम्मत आवश्यक है। लेकिन इस दौरान पानी का अपव्यय न्यूनतम रखने की जिम्मेदारी भी छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका और संबंधित ठेकेदार की है। मरम्मत की पूर्व तैयारी, पानी के दबाव को नियंत्रित करने और निकासी की उचित व्यवस्था से ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है।

जाधववाड़ी सिग्नल की इस घटना के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि जल वाहिनियों की मरम्मत के दौरान पानी की बर्बादी रोकने के लिए क्या ठोस उपाय किए जा रहे हैं। शहर में जलापूर्ति सुचारू रखने के साथ उपलब्ध पानी की हर बूंद बचाना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

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