‘मैं मरा तो सरकार होगी जिम्मेदार’, मनोज जरांगे पाटिल का भयंकर ऐलान; 30 मई से खुली धूप में करेंगे आमरण अनशन
Manoj Jarange Patil Aamran Anshan Maratha Reservation: 'मैं मरा तो सरकार जिम्मेदार', मनोज जरांगे पाटिल ने 30 मई से खुली धूप में आमरण अनशन का किया एलान।
- Written By: अनिल सिंह
देवेंद्र फडणवीस को मनोज जरांगे की खुली चुनौती (फोटो क्रेडिट-X)
Manoj Jarange Patil Aamran Anshan Maratha Reservation: जालना के अंतरवाली सराटी में जुटी समर्थकों की भीड़ के सामने मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा शुरू से ही साफ रहा है; वे केवल मराठा समुदाय का बहुमूल्य वोट बैंक हथियाना चाहते हैं, लेकिन जब हक और आरक्षण देने की बात आती है, तो कदम पीछे खींच लेते हैं। जरांगे ने कहा, “हमें 100% आरक्षण देने का झूठा दिलासा दिया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि हमें केवल प्रशासनिक तारीखों और आश्वासनों के जाल में उलझाकर बेवकूफ बनाया जा रहा है।”
जरांगे पाटिल ने विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र की दुर्दशा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों में न तो पीने के लिए पानी बचा है और न ही युवाओं के भविष्य के लिए आरक्षण। यहां का मराठा समुदाय आर्थिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है और दूसरों का अत्याचार सहने के लिए मजबूर है। उन्होंने भावुक होते हुए पूछा कि सरकार को समय पर समय देने के बाद भी आखिर समाज के हाथ में क्या आया? अब बातचीत का दौर पूरी तरह खत्म हो चुका है और फैसला केवल मैदान में होगा।
वादे पूरे न होने पर भड़के जरांगे, कहा- सरकार का इरादा सिर्फ मामला लटकाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मनोज जरांगे ने पूर्व में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए लिखित और मौखिक आश्वासनों की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने वादा किया था कि मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जिन प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले मराठा युवाओं पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमों और गंभीर एफआईआर को बिना शर्त वापस लिया जाएगा। लेकिन आज महीनों बीत जाने के बाद भी इनमें से एक भी वादा धरातल पर पूरा नहीं हुआ, जिससे साबित होता है कि सरकार केवल मामले को लंबा खींचना चाहती है।
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‘अब वक्त देने की गुंजाइश खत्म’, बातचीत के लिए आए दूतों को कड़ा संदेश
कल यानी 29 मई को सरकार की ओर से मराठा उप-समिति के अध्यक्ष मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड जरांगे को मनाने के लिए अंतरवाली सराटी पहुंचने वाले हैं। उनसे मुलाकात से पहले ही अपना रुख कड़ा करते हुए जरांगे ने मीडिया के माध्यम से सरकार को संदेश भेज दिया है। उन्होंने कहा, “प्रशासन को जितना समय चाहिए था, मैं अपनी क्षमता से ज्यादा दे चुका हूं। अब मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। यदि विखे पाटिल और लाड कल आ रहे हैं, तो वे केवल ‘सगे-संबंधी’ (Sage Soyare) के कानून का अंतिम गजट (GR) लेकर ही आएं, अन्यथा खाली हाथ चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है।”
मराठा बनाम देवेंद्र फडणवीस: राजनीतिक गलियारों में मंचा हड़कंप
मनोज जरांगे द्वारा सीधे देवेंद्र फडणवीस को टारगेट किए जाने और अनशन के दौरान मौत होने पर सरकार को जिम्मेदार ठहराने वाले बयान से मुंबई के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। गृह विभाग ने जरांगे पाटिल के इस आत्मघाती अनशन के एलान को देखते हुए जालना और पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के निर्देश दिए हैं। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि 30 मई से जरांगे पाटिल की तबीयत बिगड़ती है, तो राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकती है। अब देखना यह होगा कि कल सरकार के मंत्री जरांगे के इस ‘आर-पार’ के मूड को शांत कर पाते हैं या महाराष्ट्र एक और भीषण आंदोलन का गवाह बनेगा।
