गरीब मरीजों को राहत: मुफ्त दवा योजना पर सख्ती, बाहर से दवा मंगाने पर डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई
Maharashtra Government Hospitals: महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा देना उनका अधिकार है। बाहर से दवा लाने को कहने पर डॉक्टर व अधिष्ठाता के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
- Written By: अंकिता पटेल
Jalna Free Medicine Scheme( Source: Social Media )
Jalna Free Medicine Scheme: जालना जिले संग राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराना उनका कानूनी अधिकार है। बावजूद इसके कई अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिए हैं कि यदि किसी मरीज को बाहर से दवा लाने के लिए कहेगा, तो संबंधित अधिष्ठाता और डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में बाहर से दवा खरीदने के लिए कहे जाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके चलते गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
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यही नहीं, सरकार की निःशुल्क योजना का उद्देश्य भी प्रभावित हो दवा की रहा है। ऐसी स्थिति में मरीजों व उनके परिजनों को सलाह दी गई है कि यदि उन्हें बाहर से दवा खरीदने के लिए कहा जाए, तो वे अस्पताल के अधिष्ठाता के पास लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
डॉक्टरों के खिलाफ की जाएगी सख्त कार्रवाई
चिकित्सा शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत का विकल्प दिया गया है। दवाओं की कमी व खरीद में देरी को रोकने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है।
इसके तहत अधिष्ठाताओं को स्थानीय स्तर पर दवा खरीद के विशेष अधिकार प्रदान करने के साथ ही अलग से निधि भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस व्यवस्था के बाद बाहर की दवा लिखना पूरी तरह अनुचित माना जाएगा व अब ‘स्टॉक नहीं है’ का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। बावजूद इसके जिले के कई सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की कमी देखी जा रही है।
जिले में हैं कुल 44 PHC
कई स्थानों पर रेबीज व सर्पदंश जैसी गंभीर स्थितियों के लिए जरूरी वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की जान को खतरा पैदा हो रहा है। हकीकत यह है कि कैंसर, किडनी रोग और बड़ी सर्जरी के लिए आवश्यक महंगी दवाएं व इंजेक्शन बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं।
नतीजतन, मरीच मरीजों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है। शहर में प्रमुख सरकारी अस्पताल संचालित हैं और जिले में कुल 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत हैं।
मरीजों को निःशुल्क दवा व उपचार का लाभ
जमीनी स्तर पर कई कमियां खुलकर सामने आ रही है। डॉक्टर दवाओं की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए मरीजों को बाहर भेज रहे हैं। विशेषकर सर्जिकल सामग्री, एंटीबायोटिक्स व दर्द निवारक दवाओं के लिए मरीजों के परिजनों को रात में भी निजी दुकानों के चक्कर लगाने की नौबत आ रही है।
यही नहीं, कई मामलों में मरीजों को सीटी स्कैन व एमआरआई जैसी जरूरी जांचों के लिए भी मशीन खराब है या सुविधा उपलब्ध नहीं है कहकर निजी लैब में भेजा जा रहा है।
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ऐसे में कोल्हापुर जिले के कागल के विधायक व मंत्री मुश्रीफ के सख्त निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था सुधरेगी। मरीजों को निःशुल्क दवा व उपचार का लाभ सही तरीके से मिल सकेगा।
