कन्हैया कुमार भाषण, जालना कार्यक्रम( सोर्स: सोशल मीडिया )
Jalna Event Democracy Challenges: जालना देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक असमानता व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते दबाव को भारतीय लोकतंत्र के सामने गंभीर चुनौतियां बताते हुए छात्र आंदोलन के नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि समानता पर आधारित समाज व्यवस्था ही लोकतंत्र व संविधान की रक्षा कर सकती है।
उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से प्रेरित समतामूलक समाज व्यवस्था का निर्माण समय की जरूरत है। शहर के स्वामी विवेकानंद हाईस्कूल मैदान पर आयोजित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर व्याख्यानमाला के दूसरे सत्र में ‘भारतीय लोकतंत्र के सामने चुनौतियां विषय मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
प्रमुख अतिथि रिपब्लिकन सेना के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सुशील सूर्यवंशी, प्राचार्य दादासाहेब गजहंस थे। मंच पर व्याख्यानमाला के अध्यक्ष डॉ. शांताराम रायपुरे, सचिव सुधाकर रत्नपारखे, कार्याध्यक्ष साईनाथ चिन्नादोरे, सुनील सालवे आदि मौजूद थे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष एड. ब्रम्हानंद चव्हाण ने बताया कि गत 49 वर्षों से आयोजित की जा रही व्याख्यानमाला का उद्देश्य समाज में लोकतांत्रिक व वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना व नागरिकों को अंधविश्वास से दूर रखकर जागरूक बनाना है।
कन्हैया कुमार ने कहा कि देश में बेरोजगारी व महंगाई लगातार बढ़ने के बावजूद इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय सरकारी संपत्तियां व सार्वजनिक उपक्रम कुछ बड़े उद्यमियों को सौंपे जा रहे है।
नागरिकों को केवल मतदान का अधिकार देकर बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। आवाज उठाने वालों को देशद्रोही करार दिया जा रहा है। कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि आज लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं व जाति, धर्म के नाम पर समाज में विभाजन फैलाया जा रहा है।
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लोगों को वास्तविक मुद्दों से दूर करके भावनात्मक व धार्मिक विषयों में उलझाया जा रहा है। संचालन प्रा. राजक्रांति वलसे ने किया व आभार डॉ. विजय कुमठेकर ने माना। इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, नागरिक व महिलाएं मौजूद रहीं।