स्टील नगरी को मिलेगा पहला महापौर, 23 नगराध्यक्षों के बाद अब ‘मेयर’ के हाथ में होगी जालना की चाबी
Jalna Municipal Corporation Polls: जालना में 70 साल के 'नगराध्यक्ष' युग का अंत! कल होगा पहले 'महापौर' के लिए मतदान। 16 जनवरी को स्टील नगरी को मिलेगा अपना पहला प्रथम नागरिक। जानें पूरा इतिहास।
- Written By: प्रिया जैस
जालना महानगरपालिका (सौजन्य-सोशल मीडिया)
First Mayor of Jalna:वर्ष 1952 से शुरू हुई नगर परिषद की 70 साल लंबी यात्रा अब समाप्ति की ओर है। 23 नगराध्यक्षों के बाद ‘नगराध्यक्ष’ पद इतिहास बनने जा रहा है। अब स्टील व उद्योगनगरी को मिलने जा रहा है उसका पहला महापौर, 16 जनवरी को आने वाले नतीजे न सिर्फ नए जनप्रतिनिधि का फैसला करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि शहर की सत्ता की कुर्सी पर पहली बार कौन बैठेगा व शहर की नई राजनीतिक दिशा क्या होगी।
नगर परिषद के पहले नगराध्यक्ष मोहनलाल गोलेच्छा (1952-54) रहे। इसके बाद कई नगराध्यक्षों ने सीमित अवधि के लिए कार्यभार संभाला। हालांकि, 1970-80 के दशक में माणिकचंद्र बोथरा ने लगातार 10 वर्षों (1974-84) तक पदस्थ रहे व शहर के शीर्ष पद पर यह सबसे लंबा कार्यकाल, आज भी एक रिकॉर्ड माना जाता है।
मनपा बनने के बाद इस वर्ष पहली बार चुनाव कराए जा रहे हैं। 16 वार्डों से कुल 65 नगरसेवक चुने जाएंगे। 15 जनवरी को होने वाले मतदान के लिए 454 उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं। 16 जनवरी को मतगणना के बाद पहला महापौर मिलेगा।
सम्बंधित ख़बरें
पुलिस जांच में बड़ा खुलासा, वायरल ‘ज़ॉम्बी वीडियो’ का सच आया सामने, ‘ये’ है वजह
मीरारोड: 9 साल बाद सुपारी किलर गिरफ्तार, झारखंड से दबोचा गया हत्या का मुख्य आरोपी
बंटीबबली ने मालिक के घर की चोरी, पुलिस ने 12.30 लाख का माल किया बरामद
भुसावल मंडल में नॉनइंटर लॉकिंग कार्य के चलते विशेष ब्लॉक, बडनेरा से गुजरने वाली कई ट्रेनें होंगी प्रभावित
प्रशासकों ने भी संभाला काम
नगर परिषद में लोक-निर्वाचित मंडल नहीं रहने की स्थिति में प्रशासकों ने शहर की जिम्मेदारी संभाली। एसडी बरीदे (1972-74) व एसजीबोर्ड (1984) ने प्रशासक के रूप में कार्य किया। वर्ष 2021 से 2025 के बीच संतोष खांडेकर संग अन्य अधिकारियों ने नगर प्रशासन संभाला।
भ्रष्टाचार निरोधक दल अर्थात एसीबी दस्ते के संतोष खांडेकर के रंगे हाथों रिश्वत लेने पकड़े जाने के बाद फिलहाल यह जिम्मेदारी जिलाधिकारी आशिमा मित्तल के पास है। वह पहले महापौर के चुनाव तक प्रशासनिक व्यवस्था ही शहर का संचालन कर रही है।
नगर परिषद 23 नगराध्यक्षों के नाम और कार्यकाल
- मोहनलाल गोलेच्छा 1952-195
- रंगनाच नाईक 1957-1958
- बेनीप्रसाद राय 1960-1961
- रामकिसन दायमा 1962-1968
- राय हरिश्चंद्र साहनी 1962-1973
- माणिकचंद्र बोथरा 1974-1984
- डीबी खिल्लारे 1984-1985
- व्यंकटेश गोरंट्याल 1985-1986
- शिवकुमार बैजल 1986-1987
- रमेशचंद्र चौविसीया 1987-1990
- अशोक साहनी 1990
- अशोक राऊत 1991-1993
- कैलाश गोरंट्याल 1993-1995
- ताराबाई डिघोळे 1997-1998
- किरणबाई जुन्नरकर 1998-1999
- मिठुलाल दाड 1999-2000
- रूपकुमार चौधरी 2000-2001
- भास्कर अंबेकर 2001-2006
- कल्पना लाहोटी 2006-2008
- भारती भगत 2008-2011
- पद्मा भरतीया 2012-2014
- पार्वताबाई रत्नपारखे 2015-2016
- संगीता गोरंट्याल 2017-2021
गोरंट्याल परिवार का रहा दबदबा
शहर की राजनीति में कुछ परिवारों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता रहा है जिसमें गोरंट्याल परिवार प्रमुख है। व्यंकटेश गोरंट्याल (1985-86), कैलाश गोरंट्याल (1993-95) और अंतिम नगराध्यक्ष के रूप में संगीता कैलाश गोरंट्याल (2017-2021) ने प्रतिनिधित्व किया।
इन 70 वर्षों के दौरान पुरुषों के साथ ही महिलाओं ने भी शहर प्रशासन में अहम भूमिका निभाई। ताराबाई डिघोले, किरणबाई जुन्नरकर, कल्पना लाहोटी, भारती भगत, पद्मा भरतीया, पार्वताबाई रत्नपारखे व संगीता गोरंट्याल जैसी महिला नगराध्यक्षों ने शहर के विकास में अहम योगदान दिया।
- जालना से नवभारत लाइव पर इमरान सिद्दीकी की रिपोर्ट
