जालना-जलगांव रेल मार्ग: 25 गांवों की 140 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण; सुनवाई के बाद होगी फाइनल प्रक्रिया
Jalna Jalgaon Rail Project: जालना-जलगांव रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण पर किसानों और भूमि मालिकों ने 250 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्रशासन सुनवाई के बाद प्रक्रिया को अंतिम रूप देगा।
- Written By: रूपम सिंह
जालना-जलगांव रेल परियोजना फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Jalna Jalgaon Rail Project Land Acquisition: छत्रपति संभाजीनगर जालना-जलगांव के बीच प्रस्तावित महत्वाकांक्षी रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। इससे प्रभावित भूमि मालिकों को आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया। अब तक प्रशासन को लगभग 250 आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं। निर्धारित अवधि के बाद सभी पर सुनवाई कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
177 किमी लंबी इस रेल लाइन को अजंता गुफा रेल कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में मंजूरी दी गई है। यह मार्ग जालना, राजूर, सिल्लोड़, अजंता व जलगांव को जोड़ते हुए मराठवाड़ा व उत्तर महाराष्ट्र के बीच संपर्क मजबूत करेगा। इसके तहत जालना जिले के 25 गांवों की लगभग 140 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इनमें बदनापुर तहसील के आठ, जालना तहसील का एक व भोकरदन तहसील के 16 गांव शामिल हैं।
भूमि अधिग्रहण पर किसानों की आपत्तियां, मुआवजे को लेकर असंतोष
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों को सक्षम प्राधिकरण नियुक्त किया गया है। प्रशासन के अनुसार जालना व बदनापुर क्षेत्र के गांवों में भूमि मापन का कार्य पूरा हो चुका है। इसके बाद रेलवे विभाग ने 30 मार्च को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी।
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किसानों व भूमि मालिकों ने माप, क्षेत्रफल, स्वामित्व अधिकार, कुएं, बोरवेल, निर्माण कार्य, फलदार वृक्ष, वन वृक्ष व पाइप लाइन जैसी परिसंपत्तियों के रिकॉर्ड को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कई किसानों ने भूमि व संपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर आपत्ति जताई है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि मुआवजे का निर्धारण अधिसूचना जारी होने से पहले की स्थिति के आधार पर किया जा रहा है। इसके बाद किए गए नए निर्माण, फलोद्यान या अन्य बदलाव मुआवजे में शामिल नहीं किए जाएंगे।
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मराठवाड़ा क्षेत्र को मिलेगी सहूलियत
यह मार्ग मराठवाड़ा व उत्तर महाराष्ट्र के बीच आवागमन को आसान बनाएगा। साथ ही यह विश्व प्रसिद्ध अजंता गुफाएं, राजूर गणपति मंदिर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन व धार्मिक स्थलों को बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगा। यह मार्ग आगे चलकर दिल्ली-कोलकाता रेल नेटवर्क से भी जुड़ने वाला है, जिससे क्षेत्र के आर्थिक व पर्यटन विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके लिए 7,105 करोड़ रुपये की कुल लागत आएगी, केंद्र व राज्य सरकार की 50-50 प्रश हिस्सेदारी होगी। रूट में 17 रेलवे स्टेशन व तीन सुरंगें शामिल हैं, जिसमें से एक सुरंग लगभग 23।5 किमी लंबी होगी।
