

Jalna BJP Leader Kailas Gorantyal Dancing Currency Shower: महाराष्ट्र के जालना जिले में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह विवादित मामला जालना शहर के मंमादेवी मंदिर परिसर में आयोजित एक भव्य भजन कार्यक्रम का है। कार्यक्रम के दौरान जब भजनों की धुन बज रही थी, तब कार्यकर्ताओं के विशेष आग्रह पर पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल खुद को रोक नहीं पाए और भजनों की ताल पर थिरकने लगे।
इसी बीच उत्साह में आकर उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने सीधे उनके ऊपर करेंसी नोटों की बारिश करनी शुरू कर दी। सार्वजनिक और धार्मिक मंच पर खुलेआम पैसों के इस प्रदर्शन का वीडियो रिकॉर्ड होकर इंटरनेट पर आते ही बवाल मच गया।
इस वायरल वीडियो ने आम जनता के गुस्से को इसलिए भी भड़का दिया है क्योंकि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूरा महाराष्ट्र गंभीर सूखे से जूझ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य की कुल 358 तहसीलों में से 305 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है।
विशेष रूप से मराठवाड़ा क्षेत्र में पीने के पानी और मवेशियों के लिए चारे की भीषण किल्लत बनी हुई है। राज्य का किसान फसल नुकसान और आर्थिक तंगी के कारण संकट में है। ऐसे दुखद और संवेदनशील माहौल में एक नेता और उनके समर्थकों द्वारा बेफिक्री से धन की नुमाइश करना जनता को कतई बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स ने सोशल मीडिया पर तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब प्रदेश का किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, तब सार्वजनिक आयोजनों में इस तरह धन का प्रदर्शन करना क्या जायज है? नेटिजन्स इस आचरण पर सवाल उठाते हुए जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं और संवेदनहीनता पर गहरी नाराजगी जता रहे हैं। इस घटना को लेकर पूरे महाराष्ट्र भर से गुस्सा और आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
मामला तूल पकड़ने और चौतरफा आलोचना होने के बाद भाजपा के पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने दावा किया कि भजन कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने सबसे पहले ईश्वर से सूखाग्रस्त किसानों की राहत और भलाई के लिए ही प्रार्थना की थी।
इसके साथ ही उन्होंने अपनी रक्षा में तर्क दिया कि भजनों की भक्ति में इंसान इतना तल्लीन और मंत्रमुग्ध हो जाता है कि उस समय कौन क्या कर रहा है, इसका किसी को ध्यान ही नहीं रहता। हालांकि, नेताजी की इस दलील के बावजूद नेटिजन्स का गुस्सा शांत नहीं हुआ है और इस मुद्दे पर लगातार बहस जारी है।