

नाना पाटेकर की शोकसभा में वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे हुए भावुक।
दिवंगत अभिनेता के साथ हुई अपनी आखिरी फोन कॉल को किया याद।
शोकसभा के दौरान 'लव यू बाला' कहकर पुराने पलों को किया साझा।
Tukaram Mundhe Remembers Nana Patekar Last Phone: मुंबई में आयोजित दिग्गज अभिनेता और समाजसेवी नाना पाटेकर की शोकसभा में महाराष्ट्र के एफडीए आयुक्त व वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे बेहद भावुक नजर आए। 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से दिवंगत हुए नाना पाटेकर की याद में मुंबई के प्रभादेवी स्थित पी. एल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में शोकसभा आयोजित की गई थी।
इस दौरान तुकाराम मुंढे ने नाना के साथ अपनी गहरी दोस्ती, उनके सामाजिक सरोकारों और उनके साथ हुई आखिरी फोन कॉल के भावुक पलों को साझा किया।
तुकाराम मुंढे ने नाना पाटेकर के साथ अपनी अंतिम बातचीत को याद करते हुए बताया कि नाना आमतौर पर बिना किसी विशेष वजह के अचानक फोन नहीं करते थे। उस आखिरी फोन कॉल के अंत में नाना ने उनसे बड़े स्नेह से कहा था लव यू, बाला। मुंढे ने बताया कि यह वाक्य आज भी उनके दिल में गहराई से बसा हुआ है और अपने मित्र के बिछड़ने के गम से उबरना उनके लिए नामुमकिन सा लग रहा है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज अपने प्रिय साथी को श्रद्धांजलि अर्पित करने की ताकत जुटा पाना भी उनके लिए बेहद कठिन हो रहा है।
दोनों की पहली मुलाकात साल 2015 में हुई थी, जब तुकाराम मुंढे सोलापुर के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत थे। उस समय महाराष्ट्र भीषण सूखे की चपेट में था और नाना पाटेकर 'नाम फाउंडेशन' के माध्यम से पीड़ित किसानों की मदद के लिए वहां आए थे।
तुकाराम मुंढे के आमंत्रण पर नाना उनके कार्यालय और निवास पर पहुंचे, जहां दोपहर के भोजन के दौरान दोनों के बीच किसानों और वंचित वर्ग के कल्याण पर लंबी चर्चा हुई। मुंढे ने कहा कि नाना बेहद संवेदनशील व्यक्ति थे जो अक्सर पूछते थे, अगर आप अपने लोगों की मदद नहीं कर सकते, तो आप किस काम के इंसान हैं?
इस शोकसभा में मराठी सिनेमा और कला जगत की प्रमुख हस्तियों ने शिरकत कर अपनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में शिवाजी साटम, रोहिणी हट्टंगडी, वर्षा उसगांवकर, अनंत महादेवन, निर्देशक संजय जाधव और मेहुल कुमार जैसे दिग्गजों ने उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौके पर नाना की कालजयी फिल्म नटसम्राट के किरदार की रंगोली भी बनाई गई।
हालांकि, बॉलीवुड के बड़े सितारों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। इस पर नाराजगी जताते हुए फिल्म निर्माता प्रवीण तरडे ने कहा कि बॉलीवुड की गैरहाजिरी से नाना का कद कम नहीं होता; उनके अंतिम संस्कार में मिट्टी और पसीने की सोंधी महक वाले हजारों किसान पहुंचे थे, जो इत्र लगाकर घूमने वाले सितारों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।