Middle East Geopolitical Tension Economy( सोर्स: सोशल मीडिया )
Middle East Geopolitical Tension Economy: जालना मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान, इजराइल तथा अमेरिका के बीच उत्पन्न युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है।
इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ रहा है। एलपीजी गैस और अन्य ईंधनों की आपूर्ति प्रभावित होने से आने वाले समय में उद्योगों पर गंभीर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
बांस रोपण आंदोलन के जालना जिला समन्वयक डॉ. सुयोग कुलकर्णी ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईंधन संकट से निपटने के लिए बांस एक स्थायी और प्रभावी विकल्प बन सकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रयास किए जाएं तो यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान कर सकती है।
डॉ. कुलकर्णी के अनुसार वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।
ऐसी स्थिति में सरकार की प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी गैस उपलब्ध करानी पड़ रही है, इसके बाद उर्वरक उद्योगों को गैस आपूर्ति की जा रही है और बची हुई मात्रा ही अन्य उद्योगों तक पहुंच पा रही है।
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इसका सीधा असर बड़े औद्योगिक क्षेत्री, विशेषकर स्टील और भारी उद्योगों पर घड़ रहा है। कई उद्योगों के उत्पादन पर असर पड़ा है और कुछ उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच रहे है।
इस संदर्भ में डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि “आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत देती है कि ऊर्जा के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहना भारत के लिए लंबे समय तक संभव नहीं है।