Jalgaon Nominated Councillors Dispute ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Jalgaon Nominated Councillors Dispute: जलगांव महानगरपालिका में 7 स्वीकृत नगरसेवक सदस्यों की नियुक्ति को लेकर स्थानीय राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है। संख्याबल के आधार पर शिवसेना (उबाठा) के खाते में जाने वाली एकमात्र सीट को रोकने के लिए भारतीय जनता भाजपा ने अपनी पूरी राजनीतिक बिसात बिछा दी है।
हालांकि, प्रशासकीय नियमों और तकनीकी बारीकियों के कारण भाजपा की यह ‘घेराबंदी’ फिलहाल मुश्किलों में घिरी नजर आ रही है।
महानगर निगम में कुल 75 निर्वाचित पार्षदों के आधार पर 7 स्वीकृत सदस्यों का चयन होना है। वर्तमान स्थिति के अनुसार भाजपा के पास 4, शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 2 और शिवसेना (उबाठा) के पास 1
सीट जाने की संभावना है।
भाजपा चाहती है कि ‘महायुति’ के रूप में संयुक्त दावा पेश कर पांचवीं सीट भी हासिल कर ली जाए, जिससे उबाठा का
पत्ता साफ हो सके। पार्टी का तर्क है कि चुनाव गठबंधन के रूप में लड़ा गया था, इसलिए आवंटन का आधार भी यही होना चाहिए।
भाजपा में इच्छुक उम्मीदवारों की लंबी सूची को देखते हुए पार्टी हर साल एक नए कार्यकर्ता को मौका देकर 5 लोगों का राजनीतिक पुनर्वास करना चाहती है।
चूंकि प्रशासन फिलहाल केवल 4 सीटों के संकेत दे रहा है, इसलिए पांचवीं सीट के लिए वरिष्ठ स्तर से दबाव बनाने या कानूनी रास्ता खोजने हेतु आवेदन की अंतिम तिथि को 25 मार्च तक बढ़वा लिया गया है।
यह केवल सदस्यों का मनोनयन नहीं है, बल्कि जलगांव की सत्ता पर पकड बनाए रखने की एक बड़ी कोशिश है। आगामी 27 मार्च को होने वाला चयन यह स्पष्ट कर देगा कि शहर की राजनीति की कमान किसके हाथ में रहेगी।
भाजपा के इस दावे के सामने सबसे बड़ी रुकावट विभागीय आयुक्त कार्यालय में हुआ पंजीकरण है।
शिवसेना (उबाठा) का तर्क है कि सदन के भीतर भाजपा, शिंदे गुट और अजित पवार गुट ने अपने स्वतंत्र गुट दर्ज कराए हैं।
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ऐसे में सीटों के आवंटन के वक्त ‘एकजुटता’ का दावा वैधानिक रूप से गलत है।
प्रशासन ने भी प्रारंभिक तौर पर भाजपा के संयुक्त दावे को स्वीकार नहीं किया है।