3 साल में 1.21 लाख MSME बंद, लाखों नौकरियां खत्म; सामना में शिवसेना UBT का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

MSMEs Units Closed: शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' के जरिए केंद्र पर निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि पिछले 3 साल में देश में 1.21 लाख MSME बंद हो चुके हैं, जिससे लाखों रोजगार खत्म हुए।
uddhav thackeray Shiv Sena UBT Attack On MSME Crisis In India
उद्धव ठाकरे (सोर्स: IANS)
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Shiv Sena UBT Attack On MSME Crisis In India: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र की लगातार हो रही अनदेखी को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा और तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए सनसनीखेज दावा किया है।

शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, बीते तीन वर्षों (2024 से 2026 के बीच) में देश भर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयां पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं, जिसके कारण लाखों युवाओं की नौकरियां अचानक खत्म हो गईं और वे बेरोजगार हो गए।

रोजगार देने के बजाय धार्मिक उन्माद भरा जा रहा

शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय लिखा कि पिछले 12 वर्षों से देश में पुराने उद्योग बंद हो रहे हैं और नए उद्योग शुरू करने की बातें हो रही हैं। जिस शासन में युवाओं के हाथों में रोजगार देने के बजाय उनके मन में धार्मिक उन्माद भरा जाए, वहां इससे अलग परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

सामना के संपादकीय में दावा किया गया कि साल 2024 से 2026 के बीच 1,21,805 एमएसएमई इकाइयों ने अपना संचालन बंद कर दिया है। पार्टी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह कृषि के बाद देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और निर्यात में भी इसकी बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद पिछले एक दशक में एमएसएमई इकाइयों के बंद होने की रफ्तार लगातार बढ़ती गई है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 28,764 एमएसएमई इकाइयां हुईं बंद

राज्यों के आधार पर आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए संपादकीय में बताया गया कि इस संकट से महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। महाराष्ट्र में अकेले 28,764 एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 14,176, गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयों ने हमेशा के लिए कामकाज बंद कर दिया। संपादकीय में कहा गया कि ये आंकड़े बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश और रोजगार सृजन के सरकारी दावों से मेल नहीं खाते।

35 लाख करोड़ के कर्ज के बावजूद बढ़ा संकट

शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए। लेकिन इसके बावजूद उद्यमियों को बढ़ती परिचालन लागत, बाजार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

सामना के संपादकीय में कहा गया कि राज्य सरकारों के नेता और केंद्रीय मंत्री दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए निवेश और उद्योग लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पहले से संकट झेल रहे उद्योगों को दोबारा खड़ा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई योजना नहीं

महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उद्धव ठाकरे की पार्टी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में महाराष्ट्र में 75 लाख से अधिक नए उद्यम पंजीकृत हुए, लेकिन इसी दौरान 28 हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां बंद भी हो गईं। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई लक्षित योजना न होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ रहे हैं और हजारों युवाओं की नौकरियां अचानक खत्म हो रही हैं। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार की ओर से इन उद्योगों को सहारा देने, दोबारा खड़ा करने या पुनर्जीवित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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