प्रतीकात्मक तस्वीर
जलगांव : खानदेश में रुई (Cotton) के दामों में लगातार मंदी का दौर चलने से रूई के तेजड़ियों में भारी हलचल मची हुई है। रुई के दाम (Price) गिरने का सीधा असर किसानों (Farmers) पर पड़ा है, क्योंकि कपास के दाम भी लुढ़कने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार जलगांव जिले की मंडियों में कपास 7000 से 8800 रुपए प्रति क्विंटल भाव रह गए हैं। जबकि दिसंबर महीने में किसानों को कपास के भाव उपर में 10,000 रुपए क्विंटल तक मिला।
सूत्रों के अनुसार दिसंबर में कपास के भाव में रिकॉर्ड कमी आने से किसानों ने मंडियों मे कपास लानी कम कर दी क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि कपास के भाव जल्दी11,000 रुपए क्विंटल हो जाएंगे। लेकिन यह भाव बढ़ने की जगह गिरने शुरू हो गए। क्योंकि रूई के दामों ने गोता लगाना शुरू कर दिया। दिसंबर में बढ़िया रोलर रूई के दाम उपर में 10,000 रुपए पहुंच गए थे। जो मंगलवार को फिसल कर 8000 से साढ़े आठ रुपए रह गए हैं। रूई बाजार में यह बड़ी मंदी मानी जा रही है। फिलहाल कपास के भाव में एक हजार रुपए की गिरावट आई है। इससे कपास किसान परेशान हैं। वर्तमान में कपास आठ से साढ़े आठ हजार रुपए भाव बिक रहा है। हालांकि किसानों की मांग है कि कपास का भाव 10 हजार रुपए से ऊपर होना चाहिए।
जलगांव,धुलिया में कपास का एक बड़ा क्षेत्र है। वहां के किसानों को कपास के दाम फिलहाल कम मिल रहे हैं। इसलिए किसान चिंतित हैं। भीगी कपास की उपस्थिति के कारण कीमतों में गिरावट आई है। पिछले दो दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास में तेजी आई है। लेकिन किसानों का कहना है कि राज्य में कपास का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल रहा है।
किसानों ने कपास बिक्री नहीं की है। रुई का भंडारण घर में ही कर रखा है, ताकि उन्हें 10 हजार से 13 हजार रुपए कीमत मिल सके। इस बीच कपास के भाव में युति सरकार में एक हजार रुपए की गिरावट आई। इससे कपास किसानों की कपास की कीमतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। कीमतों को लेकर किसानों की जो उम्मीद थी, उस पर पानी फिरने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले सप्ताह कपास का रेट 8 से 8.5 हजार था। इस कारण सीसीआई ने खुले बाजार में 88 हजार 400 रुपए की दर से खरीदी शुरू करने को कहा। लेकिन अब चूंकि कपास की कीमत कम हो गई है, किसान इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि सीसीआई किस दर पर कपास खरीदेगा। 95 प्रतिशत कपास किसानों के घर में धूल फांक रहा है।
इस साल कपास की बुआई 110 फीसदी रही। हालांकि वापसी की बारिश से कई जगहों पर कपास को नुकसान हुआ, लेकिन फसल बंपर हुई। बाजार में कपास की कीमत आठ से नौ हजार थी। हालांकि, किसान 10,000 से 13,000 के भाव की आशा लगाए बैठे थे। जिसके चलते किसान कपास नहीं बेच रहे थे।इस वजह से 95 फीसदी कपास किसानों ने मार्केट में बिक्री करने नही लाई हैं। जिसके चलते जिनिग संचालक कपास की कीमत दे रहे थे ताकि किसान कपास बेच सकें।
गत आठ दिनों में कपास के दाम काफी गिरे है। खानदेश के किसान नगद फसल के तौर पर कपास का उत्पादन लेते है। परंतु ऐन कपास फल आने के समय लगातार बारिश से कपास उत्पादन शानदार रहा है। अनेक किसानों ने खेत में भरा पानी मोटरपंप द्वारा बाहार निकाला। फसल किसानों के हाथ में आई। परंतु उसमें भी कपास बिनने मजदूर नहीं मिलने से किसानों ने बाहरगांव से अतिरिक्त पैसे देकर मजदूरों को बुलाया। शुरुआत में पकपास के दाम 9 हजार रुपए तक पहुंचे थे। जिससे किसानों को ओर दाम बढ़ने की उम्मीद थी। परंतु अब दिनों दिन कपास के दाम में गिरावट हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।