Akola Dust PollutionNews: अकोला शहर में धूल प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। जैसे जैसे गर्मी के दिन शुरू हो जाते हैं वैसे वैसे धूल की समस्या और अधिक बढ़ने लगती है। सड़कों पर उड़ती धूल और निर्माण स्थलों से फैलते कण न केवल वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धूल के सूक्ष्म कण श्वसन तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं और अस्थमा, एलर्जी तथा अन्य श्वसन रोगों का कारण बन रहे हैं। धूल की समस्या से निपटने के लिए मनपा को ठोस कदम उठाने होंगे। सड़कों की नियमित सफाई, पानी का छिड़काव और पौधारोपण जैसे उपाय तत्काल लागू करने की आवश्यकता है।
वृक्ष न केवल वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं, बल्कि धूल को नियंत्रित करने में भी सहायक होते हैं। इसके साथ ही निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय जैसे जालियां लगाना, पानी का छिड़काव करना और सामग्री को ढककर रखना जरूरी है। इसके अलावा वाहनों की नियमित जांच भी आवश्यक है, क्योंकि पुराने और खराब रखरखाव वाले वाहन धूल और धुएं का बड़ा स्रोत बनते हैं. स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाकर भी प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
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नागरिकों की भूमिका भी अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। नागरिकों को भी स्वच्छता बनाए रखने और धूल नियंत्रण में सहयोग करना होगा। घरों और दुकानों के आसपास सफाई रखना, अनावश्यक रूप से धूल उड़ाने वाली गतिविधियों से बचना और पौधारोपण में भागीदारी करना सभी की जिम्मेदारी है।
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स्थानीय नागरिकों कहना की
प्रसाद भगत, व्यवसायी (गौरक्षण रोड, अकोला) का कहना है, “धूल प्रदूषण से श्वसन रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि मनपा निर्माण स्थलों पर सख्ती से नियम लागू करे और नागरिक भी सहयोग दें, तो स्थिति में सुधार संभव है।”
राजेश तायडे, ट्रेलरिंग व्यवसायी (सावतराम चाल, अकोला) ने बताया, “हम रोज़ाना धूल की वजह से परेशान रहते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ होती है। मनपा को सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव करना चाहिए और नागरिकों को भी सफाई पर ध्यान देना चाहिए।”
शहर में बढ़ते धूल प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन और नागरिकों के संयुक्त प्रयास की जरूरत है, तभी अकोला को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सकता है।
