हिंगोली जिले में अवैध खनन पर राज्यपाल की बड़ी कार्रवाई, वसमत की तहसीलदार शारदा दलवी को किया निलंबित
Vasmat Tehsildar Suspended: अवैध गौण खनिज उत्खनन और परिवहन को रोकने में लापरवाही बरतने पर हिंगोली जिले में बड़ी कार्रवाई हुई है। वसमत की तहसीलदार शारदा दलवी को निलंबित कर दिया गया है।
- Written By: आकाश मसने
वसमत की तहसीलदार शारदा दलवी निलंबित (सोर्स: सोशल मीडिया)
Vasmat Tehsildar Sharda Dalvi Suspended: महाराष्ट्र के राजस्व विभाग से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। हिंगोली जिले में अवैध गौण खनिज के अवैध खनन और परिवहन पर लगाम कसने में विफल रहने वाली वसमत की तहसीलदार शारदा दलवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। 9 अप्रैल को राजस्व एवं वन विभाग के अवर सचिव प्रवीण पाटिल ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए।
क्या है पूरा मामला?
पिछले काफी समय से महाराष्ट्र के हिंगोली जिले की वसमत तहसील में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और गौण खनिज की तस्करी की शिकायतें मिल रही थीं। आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में प्रशासन को कई बार अवगत कराया था। तहसीलदार शारदा दलवी पर आरोप है कि उन्होंने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और अति-महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों में जानबूझकर लापरवाही बरती।
किन नियमों के तहत किया शारदा दलवी को निलंबित
राजस्व एवं वन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शारदा दलवी का यह व्यवहार ‘महाराष्ट्र नागरिक सेवा (आचरण) नियम, 1979’ के नियम 3 का स्पष्ट उल्लंघन है। विभाग ने माना कि उनके कार्यकाल के दौरान अवैध खनिज माफियाओं को एक तरह से मौन सहमति मिली हुई थी, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।
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निलंबन के दौरान शारदा दलवी पर कड़े प्रतिबंध
निलंबन की अवधि के दौरान शारदा दलवी का मुख्यालय जिलाधिकारी कार्यालय निश्चित किया गया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि वे कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। निलंबन काल के दौरान वे किसी भी प्रकार का निजी व्यापार, व्यवसाय या नौकरी नहीं कर सकेंगी।
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भ्रष्ट अधिकारियों को कड़ा संदेश
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेशानुसार की गई इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में खलबली मच गई है। इसे उन अधिकारियों के लिए एक सीधी चेतावनी माना जा रहा है जो माफियाओं के साथ सांठगांठ करते हैं या अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन रहते हैं। गौरतलब है कि स्थानीय मीडिया और ‘लोकमत’ जैसे समाचार पत्रों ने इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाया था।
