महाराष्ट्र में कुदरत का डबल अटैक! भारी बारिश के बीच हिंगोली, नांदेड़ और परभणी में 4 बार आया भूकंप

Maharashtra Earthquake Hingoli Nanded Parbhani: महाराष्ट्र में विभिन्न इलाकों में बीच हिंगोली, नांदेड़ और परभणी में एक ही रात में लगातार चार बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।
Hingoli Nanded Parbhani Earthquake in Maharashtra
महाराष्ट्र में भारी बारिश के बीच भूकंप (फोटो क्रेडिट-X)
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Earthquake in Maharashtra: महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र इस समय कुदरत के दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक तरफ जहां पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बेपटरी कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ हिंगोली, नांदेड़ और परभणी जिलों में आए लगातार भूकंप के झटकों ने नागरिकों को खौफ से भर दिया है।

इस क्षेत्र में एक ही रात के भीतर बैक-टू-बैक चार बार धरती कांपने से हड़कंप मच गया। स्थानीय भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले कई वर्षों में यह पहली बार हुआ है जब एक ही रात में लगातार चार तीव्रता वाले झटके दर्ज किए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस पूरी प्राकृतिक घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

रात 1:37 बजे से सुबह 3:23 बजे तक चार बार हिली धरती

सीस्मोलॉजिकल डेटा के अनुसार, हिंगोली में भूकंप का पहला और सबसे शक्तिशाली झटका मध्यरात्रि के बाद रात 1:37 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गई। इस झटके से लोग नींद से जाग गए और घबराहट में घरों से बाहर भागने लगे।

इसके ठीक बाद, रात 2:15 बजे 3.6 तीव्रता, रात 2:17 बजे 3.9 तीव्रता और तड़के सुबह 3:23 बजे 4.01 तीव्रता के तीन और झटके दर्ज किए गए। इन लगातार आए आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) का सीधा असर हिंगोली सहित पड़ोसी जिले नांदेड़ और परभणी के कई शहरी व ग्रामीण इलाकों में साफ तौर पर महसूस किया गया।

पांगरा शिंदे और काकड़धाबा गांव में सबसे ज्यादा असर

प्रारंभिक भौगोलिक रिपोर्ट के मुताबिक, पहले मुख्य भूकंप का केंद्र हिंगोली जिले की वसमत तहसील के अंतर्गत आने वाले पांगरा शिंदे गांव के दक्षिण में स्थित था। भूगर्भ के भीतर इसकी गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई थी।

Earthquake in Maharashtra
महाराष्ट्र में भारी बारिश के बीच भूकंप (फोटो क्रेडिट-X)

वहीं, इसके बाद आए दूसरे और तीसरे झटकों का केंद्र इसी पांगरा शिंदे गांव के उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित काकड़धाबा गांव के पास जमीन से 10 किलोमीटर नीचे केंद्रित था। इससे पहले इसी साल 11 अप्रैल 2026 को भी इस पूरी बेल्ट में 4.7 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आ चुका है, जिसके बाद से यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

मकानों की दीवारों में आईं दरारेंयद्यपि इस आपदा में किसी के हताहत होने की कोई दुखद खबर नहीं है, लेकिन भूकंप के बार-बार आए झटकों के कारण कई पुराने मकानों की दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं और कुछ जगहों पर छतों का प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आई हैं।

हालात को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। छत्रपति संभाजीनगर स्थित एमजीएम विज्ञान केंद्र के निदेशक श्रीनिवास एस. औंधकर ने जनता के लिए एक विशेष परामर्श जारी करते हुए कहा है कि इस तरह के झटके फॉल्ट लाइन की सक्रियता के कारण आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने, पक्के ढांचों के पास सतर्क रहने और आपातकालीन दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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