नागपुर में अतिक्रमण कार्रवाई से हॉकर्स नाराज, फुटपाथ पर रोजी-रोटी का संकट; न्याय की मांग तेज
Nagpur Hawkers Street Vendors: नागपुर में फुटपाथ विक्रेताओं और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। हॉकर्स नीति लागू होने के बावजूद फैसले टाउन वेंडिंग कमेटी की बजाय प्रशासनिक स्तर पर हो रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर हॉकर्स, फुटपाथ विक्रेता, अतिक्रमण कार्रवाई, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Hawkers Encroachment Drive: नागपुर सिटी में इन दिनों प्रशासन और फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे विक्रेताओं के बीच टकराव की स्थिति लगातार बनी हुई है। सीताबडीं, महल, इतवारी और सदर मंगलवारी बाजार रोड जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले इन हॉकर्स पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। एक तरफ प्रशासन अतिक्रमण हटाने में जुटा है वहीं दूसरी ओर विक्रेता न्याय और व्यवस्था की गुहार लगा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्र की सरकार ने हॉकर्स नीति का खाका तैयार किया। यहां तक कि राज्य की सरकार ने इसे मंजूरी देकर लागू भी किया जिसके अनुसार प्रत्येक सिटी में टाउन वेडिंग कमेटी तो तैयार हुई किंतु हॉकर्स के मसले इस कमेटी में नहीं, बल्की प्रशासन के कक्षों में तय हो रहे हैं। एकतरफा हो रहे निर्णयों के चलते ही हॉकर्स का मसला हल नहीं हो पा रहा है।
कागजों पर 43 वेंडिंग जोन, जमीन पर कुछ
नहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वर्षों के सर्वे और ‘टाउन वेंडिंग कमेटी’ (टीबीसी) की बैठकों के बाद सरकार ने शहर में 43 वेंडिंग जोन मंजूर किए थे लेकिन आज तक इन्हें जमीन पर पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। हाई कोर्ट ने भी अनेकों बार महानगर पालिका को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि लाइसेंसधारी हॉकर्स को हटाना गलत है। इसके बावजूद विक्रेताओं का सामान ट्रैक्टरों में भरकर जब्त किया जा रहा है, दुकानें हटाई जा रही हैं और गरीब तबके पर जुर्माना थोपा जा रहा है।
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हॉकर्स पर रोजी-रोटी पर संकट
इस अधूरी हॉकर नीति और बिना पुनर्वास की जा रही कार्रवाई का सीधा असर गरीब हॉकर्स की आजीविका पर पड़ रहा है। एक चाय, भेल या कपड़े बेचने वाला छोटा व्यापारी सुबह 5 बजे उठकर इसलिए दुकान लगाता है, ताकि उसके घर का खर्च और बच्चों की फीस निकल सके लेकिन अचानक होने वाली जब्ती की कार्रवाई में उसका सामान उठा लिया जाता है और पूरे दिन की कमाई पल भर में खत्म हो जाती है। इसे लेकर ‘स्मार्ट सिटी’ के मॉडल पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हॉकर्स विक्रेता साफ तौर पर प्रशासन से कह रहे हैं कि हमें स्थायी जगह दीजिए, हम किराया देने को भी तैयार हैं।
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जिम्मेदार विभागों की अनदेखी इस
पूरी अव्यवस्था के लिए मुख्य रूप से महानगर पालिका के अंतर्गत आने वाले अतिक्रमण विभाग, नगर रचना विभाग और बाजार विभाग को जिम्मेदार माना जा रहा है। इन विभागों का मुख्य काम वेडिंग जोन का सीमांकन करना, लाइसेंसधारी विक्रेताओं की रक्षा करना और शहर के ट्रैफिक व रोजगार के बीच सही संतुलन बनाना है जिसमें वे फिलहाल विफल नजर आ रहे हैं।
विक्रेताओं की प्रमुख मांगें
लाइसेंसधारी हॉकर्स की सुरक्षा : जिन्हें लाइसेंस मिला है उन्हें काम करने की पूरी सुरक्षा दी जाए।
वेंडिंग जोन का कार्यान्वयन : कागजों पर मंजूर 43 वेंडिंग जोन तुरंत जमीन पर लागू किए जाएं।
पुनर्वास के बिना कार्रवाई पर रोक : गरीबों के उचित पुनर्वास के बिना उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई बंद हो।
कानून का पालन ‘स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014: का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाए।
