शेरनी सुचित्रा (सोर्स: नवभारत फोटो) 
औरंगाबाद

सिद्धार्थ उद्यान की शेरनी सुचित्रा की मौत, फेफड़ों के गंभीर संक्रमण ने ली जान, जांच के लिए पुणे भेजे गए नमून

Lioness Suchitra Death: छत्रपति संभाजीनगर के सिद्धार्थ उद्यान की मुख्य आकर्षण रही शेरनी सुचित्रा का फेफड़ों के गंभीर संक्रमण के कारण निधन हो गया। 14 साल बाद कर्नाटक से आई इस शेरनी की मौत।

गोरक्ष पोफली

Lioness Suchitra Dies Siddharth Garden Zoo: छत्रपति संभाजीनगर सिद्धार्थ उद्यान एवं प्राणी संग्रहालय की प्रमुख आकर्षण रही शेरनी 'सुचित्रा' का फेफड़ों के गंभीर संक्रमण के कारण निधन हो गया। पिछले तीन दिनों से उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया था।

विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने लगातार उपचार किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। गुरुवार को पशुपालन विभाग और वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के बाद उद्यान परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार किया गया।

14 साल बाद कर्नाटक से आई थी शेरों की जोड़ी

करीब दस महीने पहले केंद्र सरकार की पशु आदान-प्रदान योजना के तहत कर्नाटक के शिवमोग्गा प्राणीसंग्रहालय से आठ वर्षीय शेर अर्जुन और दस वर्षीय शेरनी सुचित्रा को सिद्धार्थ उद्यान लाया गया था। लगभग 14 वर्ष बाद शेरों की जोड़ी आने से उद्यान में पर्यटकों की संख्या बढ़ गई थी। आवश्यक पृथकवास अवधि पूरी होने के बाद एक अक्टूबर 2025 से दोनों को पर्यटकों के लिए प्रदर्शित किया गया था।

तीन दिन से इलाज जारी, सुचित्रा ने छोड़ दिया था खाना-पानी

उद्यान प्रशासन के अनुसार, छह जुलाई से सुचित्रा की तबीयत खराब होने लगी थी। उसने भोजन और पानी लेना पूरी तरह बंद कर दिया था। प्रभारी पशुधन अधिकारी डॉ। संजय नंदन के मार्गदर्शन में पशु चिकित्सकों की टीम ने लगातार उपचार और निगरानी की, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।

पोस्टमार्टम के प्रारंभिक निष्कर्षों में फेफड़ों में गंभीर संक्रमण, हृदय का सामान्य से अधिक बड़ा होना तथा कुछ आंतरिक अंगों के निष्क्रिय होने की पुष्टि हुई है। अंतिम कारण जानने के लिए आवश्यक नमूने स्थानीय प्रयोगशाला के साथ पुणे भेजे गए हैं। शेरनी की मौत से प्राणी प्रेमियों और नियमित पर्यटकों में शोक की लहर है।

वन्यजीव संरक्षण पर ध्यान देने की आवश्यकता

सुचित्रा की असामयिक मृत्यु न केवल सिद्धार्थ उद्यान बल्कि देश भर के वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक गहरा आघात है। 14 साल के लंबे इंतजार के बाद उद्यान में आई शेरों की इस जोड़ी ने पर्यटकों के दिलों में एक खास जगह बना ली थी।

पशु चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद सुचित्रा को न बचा पाना यह दर्शाता है कि पिंजरों और कृत्रिम वातावरण में रहने वाले इन राजसी वन्यजीवों की सेहत कितनी संवेदनशील होती है। अब प्रशासन के सामने शेर अर्जुन की मानसिक और शारीरिक सेहत को बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अपने साथी को खोने का गहरा असर इन बेजुबानों पर भी पड़ता है।

– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

हेमंत कैबिनेट के 53 बड़े फैसले: 100 उत्कृष्ट स्कूल, 606 थानों में CCTV, मेडिकल कॉलेजों को करोड़ों की सौगात

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, महाराष्ट्र में समंदर के नीचे से पहाड़ों तक, एक साथ चल रहा काम

FREMAA Recruitment 2026: IT असिस्टेंट समेत 12 पदों पर भर्ती, 40,000 तक सैलरी; 6 सितंबर तक करें आवेदन

आंध्र प्रदेश में खौफनाक वारदात, श्रीशैलम के लॉज में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत; 3 दिन से बंद था कमरा

क्या राजनीति छोड़ रहे हैं नितिन गडकरी? संन्यास की अटकलों पर केंद्रीय मंत्री ने तोड़ी चुप्पी, जानिए पूरा सच