महाराष्ट्र में बहुत खास होता है हल्दी-कुमकुम का कार्यक्रम, इन उखाणों के साथ नवविवाहित महिलाएं बनाएं दिन को खास
सुहागिन महिलाओं के बीच हल्दी-कुमकुम का कार्यक्रम मनाया जाता है जो पूरे महीने चलता है यानि शुभ तिथियां होती है। यह त्योहार अब देश के हर हिस्से की पहचान बन चुका है जो पहले एक राज्य तक सीमित था।
- Written By: दीपिका पाल
महाराष्ट्र में हल्दी कुमकुम की धूम (सौ.सोशल मीडिया)
Haldi Kumkum 2025: 14 जनवरी को मकर संक्रांति त्योहार के साथ साल 2025 के त्योहारों की शुरुआत हो गई है यहां पर तिलगुड़ के मीठे साथ त्योहार मनाए जाएंगे। महाराष्ट्र जैसे विशाल राज्य वैसे तो हर त्योहार की धूम होती है लेकिन यहां पर मकर संक्रांति के त्योहार का महत्व होता है जिसमें सुहागिन महिलाओं के बीच हल्दी-कुमकुम का कार्यक्रम मनाया जाता है जो पूरे महीने चलता है यानि शुभ तिथियां होती है। यह त्योहार अब देश के हर हिस्से की पहचान बन चुका है जो पहले महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और राजस्थान में आयोजित किया जाता था। चलिए जानते हैं नवविवाहित महिलाओं के लिए यह कार्यक्रम कैसा होता है औऱ इसके नियम भी।
क्या होता है हल्दी कुमकुम का कार्यक्रम
आपको बताते चलें कि, महाराष्ट्रीयन महिलाओं के बीच हल्दी कुमकुम मनाया जाता है यह सुहागिन औऱ नवविवाहित महिलाओं के बीच बेहद खास होता है। यानि इस खास दिन पर महाराष्ट्रीयन महिलाएं एक-दूसरे को मिट्टी के छोटे से मटकेनुमा बर्तन में चने के होले, तिल-गुड़ के लड्डू, मूंग, चावल, गाजर व बोर मिला कर भर कर देती हैं। इसके अलावा आपस में महिलाएं एक-दूसरे को हल्दी कुमकुम लगाकर तिलगुड़ खिलाती है।
साथ ही शादीशुदा महिलाओं को सुहाग की चीजें जैसे कंगन, कुंकुम, बिंदी और फुल इत्यादि वस्तु भेंट में देती है। यहां पर पति के नाम पर उखाने लिए जाते है यानि जब वान या कोई भेंट दी जाती है तो उस एक कविता की तरह पति का नाम लिए कहनी होती है। यह उखाने कई महिलाएं बड़े ही मजेदार ढंग से पेश करती है।
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कब से हुई इस कार्यक्रम की शुरुआत
आपको बताते चलें कि, हल्दी कुमकुम मनाने की शुरुआत पेशवा साम्राज्य के दौरान हुई, उस जमाने में पुरुष युद्ध लड़ने चले जाते थे और सालों तक घर नहीं आते थे। ऐसे में महिलाएं घर से निकल नहीं सकती थीं इसलिए हल्दी कुमकुम के बहाने आस-पड़ोस की औरतों और सहेलियों को अपने घर बुलाती थी. उनके माथे पर हल्दी-कुमकुम लगाकर उनका स्वागत करती थीं. इस दौरान वो उपहार में कपड़े, इत्र व श्रृंगार का सामान भी भेंट में देती थीं. हल्दी कुमकुम के इस त्योहार को महाराष्ट्र में बहुत ही धूमधाम के मनाया जाता है।
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नए शादीशुदा जोड़ियों के लिए उखाने
यहां महाराष्ट्र में इस त्योहार की धूम एक महीने तक रहती है इस दौरान महिलाएं तिलगुड़ का लड्डू अपने घरों में ही बनाती हैं. सभी कार्यक्रम होने के बाद नए शादीशुदा कपल्स को उखाणे लेने का आग्रह किया जाता हैं। इस कार्यक्रम के दौरान आपको कुछ उखाने बता रहे है जो आप पेश कर सकती है।
1- कामाची सुरूवात होते श्रीगणेशापासून,
….. चे नाव घ्यायला सुरूवात केली आजपासून.
2- यमुनेच्या प्रवाहात ताजमहालाचे पडते प्रतिबिंब,
….. चे नाव घेण्यास मी करत नाही विलंब.
3- गोकुळाच्या कुंजवनात श्रीकृष्ण वाजवतो बासरी,
….. रावांचं नाव घेऊन निघाले मी सासरी.
4- वर्षाऋृतूत वरूणराजाने केली बरसात,
….. चे नाव घेण्यास केली मी सुरूवात.
5- बारीक मणी घरभर पसरले,
….. साठी माहेर विसरले.
नोट- खाली स्थान पर आप अपने पति का नाम जोड़ सकती है।
