हैफकिन इंस्टीट्यूट का निजीकरण नहीं होगा, वडेट्टीवार ने मांगा 150 करोड़ का फंड, सरकार ने दिया आश्वासन
Haffkine Institute No Privatisation: विधानसभा में सरकार ने स्पष्ट किया कि हैफकिन इंस्टीट्यूट का निजीकरण नहीं होगा। वडेट्टीवार ने 150 करोड़ रुपये का फंड और संस्थान के सशक्तीकरण की मांग उठाई।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
हैफकिन इंस्टीट्यूट (सोर्स:AI)
Haffkine Institute No Privatisation Government Assurance: विधानसभा में हैफकिन इंस्टीट्यूट के भविष्य को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया कि संस्थान के निजीकरण का कोई विचार नहीं है। वहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने संस्थान को मजबूत करने के लिए 150 करोड़ रुपए का फंड तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की।
वडेट्टीवार का आरोप
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले कहा था कि हैफकिन संस्थान की जमीन किसी को नहीं दी जाएगी, लेकिन बाद में टाटा समूह को शोध केंद्र स्थापित करने के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई। उन्होंने कहा कि इस विरोधाभास से सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
विजय वडेट्टीवार ने सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग करते हुए कहा कि हैफकिन जैसी ऐतिहासिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था का किसी भी रूप में निजीकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की कि संस्थान की संपत्ति और संसाधनों का उपयोग केवल सार्वजनिक हित में होगा तथा किसी निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जाएगा।
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सरकार ने दिया आश्वासन
खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवल ने स्पष्ट किया कि हैफकिन संस्थान के निजीकरण का कोई प्रस्ताव सरकार के सामने नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संबंधित अधिकारियों और विधायकों की बैठक आयोजित कर संस्थान को सशक्त बनाने पर निर्णय लिया जाएगा।
झिरवल ने बताया कि 150 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को वित्त विभाग की आपत्तियां दूर कर दोबारा मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। साथ ही डॉ. आर. ए. माशेलकर समिति की रिपोर्ट सदन में पेश की जाएगी और संस्थान में पूर्णकालिक आईएएस अधिकारी की नियुक्ति भी सुनिश्चित की जाएगी।
