62 वर्षों से आस्था का केंद्र बना गोंदिया का येडमाकोट का संतोषी माता मंदिर, श्रद्धालुओं को कर रहा आकर्षित
Santoshi Mata Temple: गोंदिया के येडमाकोट स्थित 62 वर्ष पुराना संतोषी माता मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है।
Santoshi Mata (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Gondia Tourism: गोंदिया जिले के अंतिम छोर और गोंदिया-भंडारा जिले की सीमा पर येडमाकोट स्थित संतोषी माता का मंदिर है। जहां मातारानी के दर्शन के लिए श्रध्दालुओं की भीड़ उमड़ती है। 62 वर्ष पूर्व अवलिया संत द्वारा स्थापित इस मंदिर में हर वर्ष दोनों जिलों के श्रद्धालुओं का मेला लगता है। दोनों जिलों की सीमा पर स्थित इस मंदिर में नवरात्र पर्व के दौरान घट स्थापना की जाती है और नौ दिनों तक श्रद्धालुओं के रात्रि जागरण से क्षेत्र गुलजार रहता है। संतोषी माता मंदिर देवस्थान पिछले 62 वर्षों से राज्य राजमार्ग क्र. 261 के किनारे तिरोड़ा तहसील के नवेगांव खुर्द येडमाकोट फाटे पर स्थापित है।
यह गोंदिया जिले से 55 से 60 किमी. की दूरी पर है। इस मंदिर की स्थापना अवलिया योगी पुरुष लोटांगन बाबा उर्फ येलकोट येलपतनाथ महाराज ने की थी। अनेक लोगों की बाबा पर आस्था थी क्योंकि वे अवलिया व योगी सत्पुरुष थे। हालांकि नाथबाबा ने चमत्कारी घटनाएं नहीं कीं, लेकिन क्षेत्र में कहा जाता है कि उन्होंने एक सच्चे वादे के आधार पर योग अभ्यास करके चमत्कारिक ढंग से कई लोगों के भविष्य की सच्चाई बता दी थी। इसी बीच उनकी प्रसिद्धि के कारण सेलवटपार के उनके भक्त शंकर शेंडे पाटिल और लीलाधर भंडारकर पाटिल ने जमीन दान दी और उस स्थान पर संतोषी माता मंदिर की स्थापना की गई।
प्राकृतिक सुंदरता और आस्था का संगम
प्राकृतिक सुंदरता से भी आकर्षित जिले की सीमा पर होने तथा निजी रूप में होने के कारण इस मंदिर का विकास उस प्रकार नहीं हो सका है, जिस प्रकार जिले में मंदिरों का विकास हुआ है। लेकिन इस मंदिर से श्रध्दालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। जिससे यहां पर नवरात्रि उत्सव के दौरान भारी भीड़ रहती है। संतोषी माता मंदिर के प्रति श्रध्दालुओं में काफी आस्था है, यहां साल भर श्रध्दालुओं की भीड़ लगी रहती है, क्योंकि मंदिर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
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नवरात्र में लगता है भव्य मेला
इसमें नवरात्रि उत्सव के बारे में बताया गया है कि यह स्थान एक तीर्थ का रूप लेता है। जनभागीदारी से मंदिर का रखरखाव राजनीतिक उदासीनता और बढ़चढ़ की लड़ाई में 52 वर्षों से यहां कोई सार्वजनिक समिति नहीं बनी है अथवा कोई ट्रस्ट स्थापित नहीं किया जा सका। इसलिए बिना किसी सरकारी अनुदान के सार्वजनिक धन से यह मंदिर आज भी अपनी परंपरा कायम रखने में सक्षम है। फिर भी जिले में इस तीर्थ के प्रति जागरूकता के साथ-साथ संतोषी माता मंदिर की नवरात्रि घट स्थापना तहसील में प्रसिद्ध है।
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2 जिलों से श्रद्धालुओं की उपस्थिति
येडमाकोट में संतोषी माता का यह मंदिर गोंदिया जिले के तिरोड़ा और भंडारा जिले के तुमसर तहसील की सीमा पर है। क्योंकि यह मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा हुआ है और प्रकृति के करीब है, इसलिए पर्यटक और श्रद्धालु यहां प्रतिदिन आते हैं। आश्विन और चैत्र नवरात्र में यहां भक्तों की भीड़ रहती है और दोनों जिलों के भक्त देवी दर्शन के साथसाथ नाथ महाराज के दर्शन के लिए भी आते हैं।
