Gondia Navegaon-Nagzira Wildlife News: तिरोड़ा तहसील के नीमगांव-इंदोरा क्षेत्र में प्रस्तावित नीमगांव लघु सिंचाई प्रकल्प पिछले पांच दशकों से प्रशासनिक देरी और वन विभाग की अड़चनों के चलते अधूरा पड़ा है। वर्ष 1973 में मात्र 23.70 लाख रुपये की मंजूरी से शुरू हुआ यह प्रकल्प आज तक पूरा नहीं हो सका, जिससे 13 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है।
प्रकल्प के लिए 2006 में 135.15 हेक्टेयर वन भूमि की मंजूरी मिल चुकी थी और 2008 में वैकल्पिक वनीकरण के लिए 13.18 करोड़ रुपये भी जमा किए गए। इसके बावजूद 2013 में क्षेत्र को नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प घोषित किए जाने के बाद तकनीकी अड़चनें और बढ़ गईं।
वर्तमान स्थिति में जलसंचयन का कार्य पूर्ण हो चुका है, लेकिन वन भूमि के कारण नहर निर्माण रुका हुआ है। वैकल्पिक 279 हेक्टेयर भूमि में से 22 हेक्टेयर पर पहले से जंगल और कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण होने के कारण वन विभाग ने अंतिम मंजूरी रोक रखी है।
इस प्रकल्प की लागत अब करोड़ों में पहुंच चुकी है, जबकि 2008 में ही 1876.41 लाख रुपये का संशोधित प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद किसानों को आज तक लाभ नहीं मिल पाया है।
प्रकल्प पूरा होने पर नीमगांव, इंदोरा खुर्द, भीकापुर, मेंदीपुर, पालडोंगरी, भूराटोला, चुरडी सहित 13 गांवों की 1062 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। विधायक विजय रहांगडाले ने कई बार वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान का प्रयास किया, लेकिन अब भी मामला लंबित है।
स्थानीय किसानों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि पीढ़ियां बीत गईं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है।