गोंदिया जिले में सैकड़ों खुले कुएं दुर्घटनाओं का कारण, किसानों ने मुंडेर निर्माण की उठाई मांग
Open Wells Accident: गोंदिया जिले की तिरोड़ा तहसील में बिना मुंडेर और सपाट कुएं इंसानों और जंगली जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। आए दिन होने वाले हादसों से किसानों में आक्रोश है।
- Written By: केतकी मोडक
गोंदिया में खुला कुआ (सेर्स - फोटो नवभारत)
Gondia Open Wells Accident Risk: तालाबों के जिले के रूप में गोंदिया जिले की पहचान है। तिरोड़ा तहसील में बड़े पैमाने पर धान का उत्पादन और उसके लिए पानी का भरपूर उपयोग जरूरी होता है। सिंचाई के भरपूर साधनों के बावजूद विभिन्न कारणों से पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पाने के कारण भी बड़ी संख्या में किसानों ने अपने खेतों में कुएं बना रखे हैं।
सड़क के किनारे भी है ऐसे कुएं
खेतों में ही नहीं सड़क के किनारे भी बिना मुंडेर के सपाट कुओं की कमी नहीं है। उन कुओं में बड़ी संख्या ऐसे कुओं की है जिनका उपयोग कचरा घर के रूप में भी हो रहा है। खतरा बन रहे ऐसे कुएं बिना मुंडेर व सपाट कुएं वन्यजीवों व आम लोगों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं जिनमें गिरने से वन्यजीवों सहित लोगों की जान भी जा चुकी है।
अनेक ऐसे कुएं भी है जो बड़े हादसे का कारण बन सकते है। सुरक्षा दीवार न होने से जान लेवा घटनाओं में वृध्दि ही होती जा रही है। वन्यजीवों की बहुतायत आए दिनों विभिन्न परिसरों में वन्यजीवों की ऐसे कुओं में गिरने से मृत्यु की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसे लेकर अनुमान व्यक्त किया गया है कि शिकार के लिए दौड़ते समय वन्यजीव इसमें समा जाते है।
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कई कुओं की हालत तो यह है कि धरातल से भी नीचे तक के पत्थर उखड़े हुए हैं। ऐसे से कुओं के पास से दिन के समय भी गुजरने में खतरा रहता है वहीं रात के समय में तो दुर्घटना का पूरा अंदेशा होता है।
बारिश के मौसम में घास उगने से भी खतरा
बारिश के मौसम में बिना मुंडेर के ऐसे कुएं दिखाई नहीं देते, उनकी मुंडेर के आस पास घास उग जाने के कारण पूरी तरह ढंक जाते है तथा नजर नहीं आते व भोजन की तलाश में निकले वन्यजीव उनमें गिर जाते है। आबादी वाल क्षेत्रों में तो जानकारी मिलने पर बचाट कर लिया जाता है लेकिन आबादी रहित क्षेत्रों में प्राय वन्यजीवों की मौत हो जाती है। प्रशासन के स्तर पर इस संदर्भ में व्यापक पैमाने पर सर्वेक्षण के माध्यम से कारगर उपाय किए जाएं तो बेहतर होगा।
कभी पेयजल के स्त्रोत थे
ऐसे कुओं की भरमार है जो बिना मुंडेर के हैं या फिर दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। कभी यह कुएं लोगों के लिए पेय जल का स्त्रोत हुआ करते थे। जिन्हें अब लोगों ने कचरा पात्र बना दिया है। हादसों व घटनाओं के बाद भी मुंडेर के निर्माण की दिशा में कहीं भी सार्थक पहल नहीं दिखाई देती और न ही ऐसे कुएं बंद करवाए जा रहे हैं।
वन विभाग दें विशेष ध्यान
किसान दुर्गेश मोहारे ने कहा है कि “वन विभाग द्वारा कुछ वर्ष पूर्व खेतों में जाकर बिना मुंडेरवाले कुओं का सर्वे कर सूची बनाई गई थी। लेकिन अभी तक कुछ भी नही हुआ।”
दुर्घटनाओं को रोकें
किसान शुभम नागपुरे ने कहा है कि “सरकार कई रुपये खर्च करती है। खेतों में बिना मुंडेर वाले कुओं का सर्वे कर उस पर मुंडेर बनवाएं और होने वाली दुर्घटनाओं को रोकें।”
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कुओं की करें मरम्मत
किसान पृथ्वीराज लिल्हारे ने कहा है कि “ऐसे कुएं ज्यादातर खेतों में दिखाई देते है। इनमें कई बार लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी, ऐसे कुओं की मरम्मत कर जनहानि को रोका जाए।”
मुंडेर बनाना जरुरी
किसान रमेश लिल्हारे ने कहा है कि “बिना मुंडेर वाले कुओं में गिरकर कई जानवरों की मृत्यु हुई है। सरकार इस कार्य को विशेष महत्व देकर मुंडेर बनवाएं।”
