Gondia News: मानसून नहीं बरसा तो धान उत्पादन पर पड़ेगा बड़ा असर, सालेकसा के किसान परेशान
Salekasa Monsoon: गोंदिया जिले के सालेकसा तहसील में मानसून की देरी से धान की खेती प्रभावित हो रही है। 17,500 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले केवल 197 हेक्टेयर में ही धान की नर्सरी तैयार हो सकी है।
Gondia Farmers (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Salekasa Paddy Farming: मानसून की बेरुखी ने तहसील के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस वर्ष करीब 17,500 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य है, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण अब तक सिर्फ 197 हेक्टेयर करीब 1.16 प्रतिशत क्षेत्र में ही धान की नर्सरी पौधे तैयार की जा सकी है। अधिकांश किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
यदि जल्द मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ सीजन की खेती पर गंभीर असर पड़ सकता है। मृग नक्षत्र पूरी तरह सूखा गुजर गया और आर्द्रा नक्षत्र भी समाप्ति की ओर है, लेकिन अब तक क्षेत्र में संतोषजनक बारिश नहीं हुई। ऐसे में लगभग 98 प्रश. क्षेत्र में धान की बुआई और नर्सरी का कार्य शुरु नहीं हो पाया है। जिन किसानों के पास बोरवेल की सुविधा है, केवल वही सीमित क्षेत्र में नर्सरी तैयार कर पाए हैं।
मानसून की देरी से पिछड़ी धान की बुआई
20 दिन से पिछड़ा कृषि कार्य सामान्य परिस्थितियों में जून के अंत तक धान की बुआई पूरी हो जाती है और जुलाई के अंतिम सप्ताह तक रोपाई का काम समाप्त हो जाता है। लेकिन इस वर्ष बुआई पहले ही करीब 20 दिन पीछे चल रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में और देरी हुई तो रोपाई अगस्त तक पहुंच सकती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
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भीषण गर्मी और बारिश के अभाव में क्षेत्र का भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिन किसानों ने बोरवेल के भरोसे धान की नर्सरी तैयार की है, उन्हें पौधों को जीवित रखने के लिए लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। पर्याप्त वर्षा के बिना नर्सरी का समुचित विकास संभव नहीं है, जिससे आगे की रोपाई भी प्रभावित हो सकती है।
किसानों की बढ़ी चिंता
मौसम विभाग पहले ही इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान जता चुका है। अब तक मानसून की अच्छी बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। यदि आगामी दिनों में भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो धान की खेती को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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अच्छी बारिश का इंतजार
सालेकसा के किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। समय पर अच्छी बारिश होने पर ही खरीफ सीजन की उम्मीदें बची रह सकती हैं। यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो धान उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है। किसानों ने सरकार से हालात पर नजर रखने, आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर राहत उपाय लागू करने की मांग की है।
जल्दबाजी से नुकसान
सालेकसा तहसील कृषि अधिकारी नम्रता चौधरी ने कहा कि किसान पर्याप्त वर्षा होने से पहले धान की बुआई शुरू न करें। कम बारिश में जल्दबाजी से की गई बुआई के बाद यदि बारिश रुक गई तो किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है, जिससे लागत और नुकसान दोनों बढ़ेंगे।
