Gondia Tribal Area News: महाराष्ट्र के गोंदिया जिला की सालेकसा तहसील आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। आदिवासी बहुल और पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र में विकास की गति बेहद धीमी नजर आ रही है। ग्रामीणों को आज भी सड़क, बिजली, पेयजल और संचार जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
डोंगरगढ़ रोड के आगे स्थित टोयागोंदी, जमाकुडो और दर्रेकसा जैसे गांवों में पक्की सड़कों का अभाव है। गांवों को जोड़ने वाले रास्ते जर्जर स्थिति में हैं, जो विशेषकर बारिश के मौसम में जोखिम भरे हो जाते हैं। डोंगरगढ़ घाट के आगे लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में बसे इन गांवों के नागरिक खुद को अब भी पिछड़े दौर में जीने को मजबूर मानते हैं।
क्षेत्र में न तो समुचित सड़कें हैं, न ही नालियों की व्यवस्था, बिजली आपूर्ति भी अनियमित है और पेयजल की समस्या गंभीर बनी हुई है। संचार क्रांति के दौर में भी यहां के करीब 20 गांवों और बस्तियों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। स्थानीय लोगों को मोबाइल उपयोग के लिए पड़ोसी छत्तीसगढ़ के नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी तंत्र की उपस्थिति केवल औपचारिक रह गई है। कर्मचारी नियमित रूप से सेवाएं देने के बजाय केवल वेतन लेने तक सीमित हैं, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
उल्लेखनीय है कि सालेकसा तहसील पिछले करीब 30 वर्षों से नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्र के रूप में जानी जाती रही है। तहसील के गठन को 44 वर्ष पूरे होने के बावजूद यहां भौतिक विकास अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
हालांकि, बीते कुछ वर्षों में बदलाव के संकेत भी दिखे हैं। देश में संचार और तकनीकी विस्तार का असर यहां के युवाओं पर भी पड़ा है। विशेषकर पिछले दो वर्षों में कई युवाओं ने विभिन्न माध्यमों के जरिए अपने लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया धीरे-धीरे तेज होती दिखाई दे रही है।