गोंदिया में बिजेपार तालाब अधिकार को लेकर वन अधिकार आंदोलन तेज, तीसरे दिन भी जारी आमरण अनशन
Forest Rights Protest: सालेकसा में तालाब नीलामी के विरोध में वन अधिकार महासंघ का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी। मांगें पूरी न होने पर आंदोलनकारियों ने दी सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी।
- Written By: केतकी मोडक
वन अधिकार प्रबंधन समिति महासंघ का आमरण अनशन का तीसरा दिन (सोर्स - फोटो नवभारत)
Gondia Salekasa Tribal Rights Protest: अनुसूचित जनजाति व अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 तथा नियम 2008 व संशोधित नियम 2012 के तहत गठित सामूहिक वन अधिकार प्रबंधन समिति महासंघ का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर लगातार उपेक्षा का आरोप लगाते हुए तीव्र नाराजगी व्यक्त की।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि गिरोला, पांढरी, खोलगढ़ और भजियादंड ग्रामसभाओं को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा सामूहिक वन अधिकार के अभिलेख प्रदान किए गए हैं। इसके बावजूद ग्रामसभाओं के अधिकार क्षेत्र में आने वाले तालाबों और अन्य संसाधनों पर प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि दो दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि मजबूर होकर सामूहिक आत्मदाह जैसा कदम उठाना पड़ सकता है। किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।
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आंदोलनकारियों का कहना है कि बिजेपार क्षेत्र के विभिन्न तालाबों में वर्ष 2025 के आर्थिक सत्र के लिए मत्स्य बीज डाला गया है। यदि इन तालाबों का आवंटन किसी अन्य संस्था या विभाग को किया जाता है तो ग्रामसभाएं इसका विरोध करेंगी।
45 ग्रामसभाओं के प्रतिनिधि शामिल
महासंघ ने मांग की है कि ग्रामसभाओं के अधिकार क्षेत्र में आने वाले तालाबों की नीलामी तत्काल रद्द कर उन्हें वन अधिकार कानून के तहत गठित समितियों को सौंपा जाए। इस संबंध में गोंदिया जिले के जिलाधीश, सांसद, विधायक, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला परिषद, गुट विकास अधिकारी सहित विभिन्न विभागों को कई बार ज्ञापन और पत्र सौंपे जा चुके हैं।
आंदोलन में अध्यक्ष मंतूरा मरकाम, विश्वनाथ मेंढ़े, उत्तम चर्जे, प्रेमलाल वटी, जितेंद्र माहुले, भरत फुंडे, मेहतर भट्टी, व्यंकट शेंडे, रोहित वटी, प्रदीप मच्छरके सहित 45 ग्रामसभाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं।
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अनशन पर बैठे 78 वर्षीय अनशनकारी की बिगड़ी तबीयत, उचित चिकित्सा का अभाव
आंदोलन के तीसरे दिन भी अनशन पर बैठे 78 वर्षीय रोहित नेताम की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
एक वृद्ध अनशनकारी की लगातार खराब होती स्वास्थ्य स्थिति अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि शासन तत्काल हस्तक्षेप कर उनकी समस्याओं का समाधान करें, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
