गोंदिया: सालेकसा में वन हक्क महासंघ का आंदोलन, मांगें नहीं मानी गईं तो रेल रोको और रास्ता रोको की चेतावनी
Forest Rights Act: वन अधिकार कानून 2006 के तहत सामूहिक अधिकारों की मांग को लेकर सालेकसा की 45 ग्रामसभाओं ने मोर्चा खोल दिया है। मांगें पूरी न होने पर आज 19 जून से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
- Written By: केतकी मोडक
Gram Sabha Protest Gondia: वन अधिकार कानून 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामूहिक वन अधिकारों से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की मांग को लेकर सामूहिक वन हक्क व्यवस्थापन समिति महासंघ ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सालेकसा में आयोजित एक चर्चा में महासंघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आज 19 जून 2026 से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा, इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गई तो रेल रोको, रास्ता रोको और भूख हड़ताल जैसे उग्र आंदोलन किए जाएंगे, महासंघ का कहना है कि गिरोला, पांढरी, खोलगढ़, भाजियादंड सहित कई ग्रामसभाओं को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा सामूहिक वन अधिकारों की मान्यता और अभिलेख प्रदान किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद वन अधिकार कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों का पूर्ण लाभ ग्रामसभाओं को नहीं मिल रहा है। महासंघ ने आरोप लगाया कि विभिन्न तालाबों और संसाधनों पर सालेकसा , वन अधिकार कानून 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामूहिक वन अधिकारों से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की मांग को लेकर सामूहिक वन हक्क व्यवस्थापन समिति महासंघ ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सालेकसा में आयोजित एक चर्चा में महासंघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आज 19 जून 2026 से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा, इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गई तो रेल रोको, रास्ता रोको और भूख हड़ताल जैसे उग्र आंदोलन किए जाएंगे, महासंघ का कहना है कि गिरोला, पांढरी, खोलगढ़, भाजियादंड सहित कई ग्रामसभाओं को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा सामूहिक वन अधिकारों की मान्यता और अभिलेख प्रदान किए जा चुके हैं।
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इसके बावजूद वन अधिकार कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों का पूर्ण लाभ ग्रामसभाओं को नहीं मिल रहा है। महासंघ ने आरोप लगाया कि विभिन्न तालाबों और संसाधनों पर ग्रामसभाओं के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है, जबकि वन अधिकार कानून के तहत इन पर चर्चा में बताया गया कि ग्रामसभाओं ने अपने क्षेत्रों के तालाबों में मत्स्य बीज डालकर मत्स्य उत्पादन शुरू किया है।
यदि इन तालाबों का आवंटन किसी संस्था या अन्य एजेंसी को किया गया है तो महासंघ इसका विरोध करेगा और कानूनी आपत्ति दर्ज कराएगा। तालाबों का लिलाव रद्द कर संबंधित सामूहिक वन अधिकार समितियों को सौंपने की मांग भी की गई है।
योजनाओं के लाभ से वंचित
महासंघ की ओर से यह मांग पत्र गोंदिया जिले के जिलाधीश, सांसद, विधायक, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, जिप सीईओ, पंचायत समिति व अन्य विभागों को भेजा गया है। आंदोलन में सोनपुरी, खोलगढ़, पाउलदौना, नानवा, बंजारी, हलबीटोला, नवाटोला, पांढरवानी, मुंडीपार, पानगांव, दलदलकुही, मानागढ़, दरेकसा, बाकलसर्रा, शेरपार समेत 45 ग्रामसभाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं। आरोप लगाया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा उपेक्षा किए जाने से ग्रामसभा सदस्यों में नाराजगी है। वन समितियों के पदाधिकारी और सदस्य योजनाओं के लाभ से भी वंचित हैं।
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CEO पर भी लगाए गए गंभीर आरोप
चर्चा में उपस्थित सदस्यों ने तत्कालीन जिप सीईओ पर भी गंभीर आरोप लगाए, उनका कहना था कि मत्स्यपालन तालाबों और सामूहिक वन अधिकार से जुड़े मामलों में लगातार टालमटील की गई तथा समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनका तबादला कर दिया गया, महासंघ ने उनके खिलाफ दफ्तर दिरंगाई (कार्य में लापरवाही) की कार्रवाई की मांग भी की।
महासंघ के अध्यक्ष मंतूरा मरकाम, विश्वनाथ मेढे, उत्तम वरजे, प्रेमलाल वटी, जितेंद्र माहुले, भरत कुंडे, मेहतर भट्टी, व्यंकट शैडे, रोहित वटी, प्रदीप मच्छरके सहित अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि 19 जून तक मांगे पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
