साकोली में बढ़ती रेत तस्करी पर सरपंच ने विधायक नाना पटोले से की मुलाकात, अधिकार ग्राम पंचायतों को देने की मांग
Sakoli Sand Smuggling: साकोली क्षेत्र में बढ़ती रेत तस्करी को रोकने के लिए लवारी ग्राम पंचायत ने रेत घाटों के संचालन और बिक्री के अधिकार ग्राम पंचायतों को सौंपने की मांग की है।
Sakoli sand smuggling (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Bhandara Sand Issue: क्षेत्र में बढ़ती रेत तस्करी और उससे उत्पन्न समस्याओं को लेकर लवारी ग्रापं के सरपंच नरेश नागरीकर ने स्थानीय विधायक नाना पटोले से मुलाकात कर एक महत्वपूर्ण मांग की है। उन्होंने मांग की है कि रेत घाटों के संचालन और बिक्री के सारे अधिकार सीधे संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपे जाएं, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। सरपंच नागरीकर ने कहा कि सरकार की लेटलतीफी के कारण रेत घाटों की नीलामी समय पर नहीं हो पाती, जिसका पूरा फायदा अवैध तस्कर उठा रहे हैं।
दूसरी ओर, क्षेत्र के कई शिक्षित युवाओं ने बैंक से कर्ज लेकर ट्रैक्टर, ट्रक और टिप्पर जैसे वाहन खरीदे हैं, ताकि वे रेत परिवहन का व्यवसाय कर सकें। लेकिन अधिकृत रूप से रेत उपलब्ध न होने के कारण ये बेरोजगार युवक कर्ज की किश्तें चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं।
रेत की चोरी धड़ल्ले से जारी
वहीं रात के अंधेरे में रेत की चोरी धड़ल्ले से जारी है, जिससे सरकारी राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि जिस ग्रापं की सीमा में रेत घाट आता है, उसी पंचायत को नियंत्रण और बिक्री का अधिकार दिया जाए। इससे तस्करी पर रोक लगेगी और ग्रापं को आय का नया स्रोत मिलेगा।
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ग्रामीण विकास की समस्याओं का समाधान
व्यावहारिक शुल्क व जुर्माना राशि निर्धारित करेंलवारी सरपंच ने वाहनों के हिसाब से एक व्यावहारिक शुल्क और जुर्माना राशि निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और अवैध वसूली रुके। उन्होंने बताया कि पंचायतों के पास पर्याप्त फंड न होने से गांवों में स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। यदि रेत घाटों से आय का अधिकार ग्राम पंचायतों को मिलता है, तो वे घाटों पर अपनी निगरानी चौकी स्थापित कर इस अवैध कारोबार को रोक सकती हैं और प्राप्त आय से ग्रामीण विकास की समस्याओं का समाधान कर सकती हैं।
