गोंदिया में नदी किनारे अवैध डंपिंग पर नाराजगी, CCTV और सख्त कार्रवाई की मांग
Goregaon River Pollution: पांगोली नदी के किनारे व्यापारिक व घरेलू कचरा खुलेआम फेंका जा रहा है; ग्रामीणों ने जल‑प्रदूषण व बीमारियों का खतरा बताते हुए निगरानी, सफाई और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
- Written By: केतकी मोडक
पांगोली नदी में कचरा (सोर्स- फोटो नवभारत)
Gondia River Chemical Waste: गोंदिया जिले के गोरेगांव तहसील के गोरेगांव-झांझिया मार्ग स्थित पांगोली नाले (नदी) के पुल के किनारे इन दिनों भारी मात्रा में कचरा फेंका जा रहा है। लगातार बढ़ते कचरे के ढेर के कारण यह खूबसूरत प्राकृतिक क्षेत्र धीरे-धीरे अवैध डंपिंग जोन में तब्दील होता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने इस दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दुकानों से निकलने वाला प्लास्टिक, कांच, रासायनिक अपशिष्ट (वेस्ट) तथा अन्य ठोस कचरा खुलेआम नदी के किनारे और पुल के आसपास डाला जा रहा है। इससे न केवल पूरे क्षेत्र की स्वच्छता प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी इसके बेहद प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग रात के अंधेरे का या सुनसान अवसरों का फायदा उठाकर यहां धड़ल्ले से कचरा फेंक रहे हैं।
चूंकि मानसून का सीजन सक्रिय है, ऐसे में यह कचरा बहकर सीधे पांगोली नदी के मुख्य जलप्रवाह में पहुंच सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर जल प्रदूषण बढ़ने और भूजल दूषित होने का खतरा है। इसका सीधा असर नदी किनारे की कृषि भूमि, मवेशियों और आसपास रहने वाली आबादी पर पड़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए झांझिया ग्राम पंचायत ने भी मामले को बेहद गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
सम्बंधित ख़बरें
Polio Campaign: महागांव में पल्स पोलियो अभियान की सभी तैयारियां पूरी, 29 जून को बच्चों को पिलाई जाएगी दो बूंद
रेलवे का महाअजूबा? जितने टिकट बुक हुए, उतने ही हो गए कैंसिल; RTI के आंकड़ों से नागपुर रेल मंडल पर उठे सवाल
शेगांव-पंढरपुर वारी: वारकरियों की सुरक्षा के लिए अकोला आरटीओ ने वितरित किए रिफ्लेक्टिव बेल्ट
पहली बारिश ने खोली निर्माण कार्यों की पोल, खेतों में तबाही, रेलवे अंडरपास में जलभराव से बढ़ी लोगों की परेशानी
कांच व्यापारियों को जल्द थमाया जाएगा नोटिस
पंचायत समिति गोरेगांव नगर उपाध्यक्ष मल्लेशयाम येरोला ने कहा है कि “पांगोली नदी किनारे फेंके जा रहे कचरे और विशेषकर कांच के टुकड़ों के विषय में जानकारी प्राप्त हुई है। इस पर संज्ञान लेते हुए जल्द ही नगर पंचायत द्वारा शहर में स्थित सभी कांच व्यापारियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फेंकने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
सफाई अभियान चलाने और सीसीटीवी लगाने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है कि यदि शहर में नियमित सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं, तो नदी किनारे लगातार कचरा कैसे जमा हो रहा है? उन्होंने इस अवैध गतिविधि पर निगरानी रखने के लिए परिसर में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने, संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त निरीक्षण करने और एक विशेष निगरानी दल (फ्लाइंग स्क्वाड) गठित करने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि पांगोली नदी इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलधारा है। यदि समय रहते इसे प्रदूषण से नहीं बचाया गया, तो भविष्य में यहां गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी संकट उत्पन्न हो सकते हैं। इसी के चलते अब क्षेत्र में ‘पांगोली नदी बचाओ, पर्यावरण बचाओ’ की मांग तेजी से जोर पकड़ने लगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस कचरे को हटाकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे सड़क पर उतरकर जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
बढ़ रहा बीमारियों का प्रकोप
नदी किनारे जमा कचरे के ढेर से चौबीसों घंटे उठने वाली तीखी दुर्गंध के कारण आसपास के परिसरों में मच्छरों, मक्खियों और अन्य रोगवाहक कीटों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे स्थानीय बस्तियों में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, डायरिया (दस्त) और त्वचा रोग जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
यह भी पढ़ें:- ‘हमें नहीं लगता कि यह मर्डर है…’ केतन अग्रवाल केस में सिया गोयल के वकील का बड़ा दावा
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि नदी, नालों और सार्वजनिक जलस्रोतों के पास इस प्रकार कचरा फेंकना पर्यावरण संरक्षण अधिनियमों और स्वच्छता कानूनों का सरेआम उल्लंघन है। स्थानीय निकायों की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करें तथा अवैध रूप से प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर सख्त कार्रवाई करें।
