नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प (सौजन्य-नवभारत)
NNTR Buffer Zone 185 Villages: प्रकृति से भरपूर विदर्भ में नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प अब नई ऊंचाइयों पर पहुंचने की तैयारी कर रहा है, और वन्यजीव संरक्षण के मामले में जल्द ही अहम फैसले लागू किए जाएंगे। ऐसे संकेत हैं कि हरे-भरे जंगलों में बसा यह अभ्यारण्य भविष्य में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनेगा।
विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों ने परिसर में जैवविविधता का विस्तृत जायजा लिया। नवेगांव नागझिरा क्षेत्र संचालक पीयूषा जगताप ने इस मौके पर कहा कि इस परिसर के मौसम, रहने की जगह और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए वन्यजीवों की संख्या में काफी बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है।
वन विभाग के अनुसार, नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प के बफर जोन के प्रशासकीय स्थानांतरण की प्रक्रिया आखिरी चरण में पहुंच गई है। इस विस्तार से, 185 गांव व्याघ्र प्रकल्प के दायरे में आ जाएंगे। इस फैसले से न सिर्फ वन्यजीव के लिए सुरक्षित अधिवास बनेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी यह एक संजीवनी होगा।
पर्यावरण हितैषी पर्यटन, मार्गदर्शन सेवा, होमस्टे, हस्तकला व स्थानीय उत्पादन बिक्री से गांव वालों के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे। उम्मीद है कि जंगल के आस-पास पैदा होने वाले ये मौके गांव की आय को नई रफ्तार देंगे।
बफर जोन का विस्तार जितना जरूरी है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। मानव-वन्यजीव संघर्ष, ध्वनि प्रदूषण और बढ़ते पर्यटन से होने वाले तनाव को नियंत्रण करने के लिए वन विभाग तैयार है। उपसंचालक प्रीतम सिंह कोडापे और विभागीय वन अधिकारी अतुल देवकर ने कहा कि वन्यजीव व स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। शाश्वत विकास व संवर्धन बीच संतुलन बनाए रखना ही भविष्य की असली परीक्षा होगी।
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नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प का यह विस्तार सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव के बीच मिल-जुलकर रहना एक खूबसूरत प्रयोग है। जंगल की गोद में खिल रही ये नई उम्मीदें विदर्भ के पर्यावरण भविष्य को एक नई दिशा देंगी।