गोंदिया के लोगों ने ली राहत की सांस, आदमखोर तेंदुआ पिंजरे में कैद, वन विभाग को मिली बड़ी कामयाबी

Man Eater Leopard Captured Gondia: गोंदिया के तिरोड़ा में आदमखोर तेंदुए का खौफ खत्म। 9 दिनों बाद वन विभाग ने तेंदुए को बेहोश कर पकड़ा। 3 साल के मासूम की जान लेने वाले तेंदुए को नागपुर भेजा गया।
Man-eater leopard captured in Tirora, Gondia after 9 days of terror.
गोंदिया में पकड़ा गया तेंदुआ (सौजन्य-नवभारत)
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Gondia News: गोंदिया जिले के तिरोड़ा तहसील के खड़की-डोंगरगांव में 9 जनवरी को सुबह अपने घर के पीछे आंगन में चूल्हे के पास माता-पिता के साथ हाथ सेक रहे 3 वर्षीय हियांस रहांगडाले पर घात लगाए बैठे तेंदुए ने अचानक हमला किया और उसे उठाकर ले गया। जिसमें उसकी मौत हो गई। तब से इस गांव और आस-पास के गांवों में इस तेंदुए का आतंक फैल गया था।

लेकिन फिर वन विभाग को 17 जनवरी को बुचाटोला और खड़की के पास के क्षेत्र में पिछले कई दिनों से आतंक मचा रहे तेंदुए को पकड़ने में बड़ी कामयाबी मिली। इस बेहद फुर्तीले तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग को ट्रैंक्विलाइजर गन का इस्तेमाल करना पड़ा। आखिरकार, तेंदुए को बेहोश करके खड़की डोंगरगांव इलाके में पकड़ लिया गया, जिससे इलाके के लोगों को राहत मिली है।

वन विभाग ने चलाया ऑपरेशन

शनिवार, 17 जनवरी को सुबह-सुबह बुचाटोला में परमानंद भगत के घर के आंगन में तेंदुआ घुस आया और एक बैल पर हमला करने की कोशिश की। इस घटना के बाद परिसर में काफी तनाव निर्माण हो गया। लेकिन बच्चे की मौत के बाद गांव के स्कूल में कैंप कर रही वन विभाग की टीम ने तुरंत तेंदुए को ट्रैक करना शुरू कर दिया। जैसे ही पता चला कि तेंदुआ खड़की/डोंगरगांव परिसर में है, वन विभाग के एक्सपर्ट शूटर्स ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया। कुछ देर बाद तेंदुआ शांत हो गया और उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया। जैसे ही यह जानकारी गांव में फैली, गांव वालों ने एक तरह से जश्न मनाया।

स्कूलों में अब लौटेंगे बच्चे

इस आदमखोर तेंदुए का आतंक पूरे इलाके में फैल गया था। इस भयानक स्थिति का ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा था। आस-पास के कई गांवों में तेंदुओं के डर से माता-पिता ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया था। इससे परिसर की आंगनवाड़ी और स्कूल सूने हो गए थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा था।

तिरोड़ा तहसील के खड़की/डोंगरगांव, नीमगांव, बुचाटोला और रुस्तमपुर गांव घने जंगलों से घिरे हैं। इस परिसर में तेंदुए का आना-जाना आम बात रही है, लेकिन हाल की घटना के बाद, तेंदुओं के आदमखोर होने के डर से ग्रामवासियों की चिंता बढ़ गई थी। इस वजह से, बच्चे न सिर्फ स्कूल जाने से बच रहे थे, बल्कि घरों से बाहर भी नहीं निकल पा रहे थे।

शाम होने के बाद गांव में सन्नाटा

तेंदुओं के डर से शाम 6 बजे के बाद गांवों में सन्नाटा छा जाता था। सुरक्षा कारणों से ग्रामवासियों ने घरों से बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया था। खेतों में जाना, मजदूरी करना और यहां तक ​​कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाहर निकलना भी खतरनाक हो गया था।

पिछले नौ दिनों से वन विभाग की एक टीम आदमखोर तेंदुए की तलाश के लिए अभियान चला रही थी। जंगल के परिसर में गश्त बढ़ा दी गई थी और संभावित जगहों पर पिंजरे लगाए गए थे। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, तेंदुए को नागपुर भेजा गया है।

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