खुनारी गांव में अनोखा बाहुला-बाहुली विवाह, जीवंत हुई ग्रामीण संस्कृति और परंपरा
Bhaatukali Tradition: भंडारा जिले के पालांदुर क्षेत्र के खुनारी गांव में ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवंत रखने के उद्देश्य से अनोखे बाहुला-बाहुली (गुड़िया-गुड्डा) विवाह समारोह का आयोजन किया।
Doll Marriage Ceremony (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Khunari Village: ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से पालांदुर क्षेत्र के खुनारी गांव में एक अनोखे बाहुला-बाहुली विवाह समारोह का आयोजन किया गया। बचपन के लोकप्रिय भातुकली खेल की परंपरा को सहेजने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीणों की पुरानी यादों को फिर से ताजा कर दिया। गांव के लोगों ने इस आयोजन को वास्तविक विवाह समारोह की तरह भव्य रूप दिया।
विवाह की पत्रिका छपवाई गई, मंडप पूजन और हल्दी समारोह आयोजित किया गया तथा बैंडबाजे के साथ पूरे उत्साह से विवाह संपन्न कराया गया। यह समारोह प्रभु सेलोकर के निवास स्थान पर शुभ मुहूर्त में आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों ने दूल्हा और दुल्हन पक्ष की भूमिका निभाते हुए पूरे उत्साह से भाग लिया।
लोक परंपराओं को सहेजने की अनूठी पहल
कार्यक्रम के लिए पूरे गांव ने एकजुट होकर तैयारियां कीं। विवाह समारोह के दौरान पूरे गांव के लोग सामूहिक भोज में शामिल हुए, जिससे सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश भी मजबूत हुआ। आयोजन की जिम्मेदारी धनराज सेलोकर, रोशन निंबार्ते और तामेश्वर सेलोकर ने संभाली, जबकि गांव की महिला मंडली ने भी बढ़चढ़कर सहयोग किया।
सम्बंधित ख़बरें
कल्याण रूट के यात्रियों की टेंशन खत्म! ₹2,782 करोड़ की पनवेल-कर्जत रेल परियोजना लगभग पूरी, जल्द दौड़ेंगी लोकल
Viksit Bharat 2047: पीयूष गोयल ने मुंबई में की AI आधारित रोजगार पहल शुरू; बोले युवा संभालें देश का नेतृत्व
राज ठाकरे के बैलट नहीं तो चुनाव का बहिष्कार पर सुप्रिया सुले का समर्थन, क्या चुनाव का बहिष्कार करेगा विपक्ष?
प्याज की कीमतों में उछाल, भंडारा में रसोई का बजट बिगड़ा, उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी
गांव ने मनाया गुड़िया-गुड्डे का विवाह
लोक परंपराओं व संस्कृति से जुड़ने का अवसर ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों और गुरूजनों ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में पारंपरिक मूल्यों और आपसी अपनत्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नई पीढ़ी को मिला संस्कृति से जुड़ने का अवसर
कार्यक्रम की सफलता के लिए कल्पना सेलोकर, वैशाली सेलोकर, अश्विनी सेलोकर, मंगला सेलोकर, उमा सेलोकर, वर्षा भुते, वनिता खराबे सहित अनेक ग्रामीणों ने विशेष योगदान दिया। खुनारी गांव का यह बाहुलाबाहुली विवाह समारोह केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर लोगों के बीच लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
