Gondia News: पर्यटन स्थलों से युवाओं को मिलेगा रोजगार, कचारगढ़ व हाजराफॉल में तीन राज्यों से आते हैं पर्यटक

Gondia Tourist Places: गोंदिया जिले के कचारगढ़ और हाजराफॉल पर्यटन स्थलों के विकास से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, बेहतर रेल कनेक्टिविटी और ठहरने की सुविधाओं की मांग को उजागर करती है।
Gondia tourist places
Salekasa employment (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Kachargarh Tourism: गोंदिया जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर तथा सालेकसा तहसील मुख्यालय से लगभग 13 किमी की दूरी पर, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित आदिवासी समाज के श्रद्धास्थल कचारगढ़ और हाजराफॉल सहित कई पर्यटन स्थल मौजूद हैं। इन स्थलों के विकास से तहसील के स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। इस दिशा में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कब ध्यान देंगे, यह सवाल तहसीलवासियों द्वारा उठाया जा रहा है।

सालेकसा एक आदिवासी बहुल, नक्सल दृष्टि से संवेदनशील तथा सघन वनक्षेत्र वाली तहसील है। यहां 90 प्रतिशत से अधिक लोग खेती और उससे जुड़े पूरक व्यवसायों पर निर्भर हैं। ऐसे में पर्यटन स्थलों के विकास से युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सकता है और शहरों की ओर होने वाला पलायन भी रोका जा सकता है।

आदिवासियों का धार्मिक स्थल कचारगढ़

सालेकसा तहसील अंतर्गत मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर स्थित दरेकसा रेलवे स्टेशन से लगभग तीन किलोमीटर दूर, धनेगांव के घने जंगलों में गोंड समुदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल कचारगढ़ स्थित है। सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह गुफा एशिया की सबसे विशाल प्राचीन प्राकृतिक गुफाओं में से एक मानी जाती है। इसे आदिवासी गोंड समुदाय का उद्गम स्थल कहा जाता है। प्रतिवर्ष माघ माह की पूर्णिमा से यहां आदिवासी समाज के आराध्य देवता महागोगोना कोयापूनम की महापूजा का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय गोंडवाना महा-अधिवेशन महोत्सव यात्रा के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

गोंदिया जिले के कचारगढ़ और हाजराफॉल पर्यटन स्थलों

हाजराफॉल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर

हाजराफॉल में तीन नालों का पानी एक स्थान पर एकत्र होकर ऊंचे पहाड़ से नीचे गिरता है, जिससे मनमोहक जलप्रपात का दृश्य बनता है। यह प्राकृतिक सौंदर्य हर पर्यटक को आकर्षित करता है। इस स्थल के विकास से बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से पर्यटक वर्षभर यहां आते हैं। विशेष रूप से मानसून के दौरान यहां का नजारा अत्यंत मनोहारी होता है। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की भीड़ दिनभर इस स्थल का आनंद लेती दिखाई देती है। बच्चों के लिए उपलब्ध खेल सामग्री के कारण परिवारों में यहां आने की उत्सुकता बनी रहती है।

ट्रेनों के स्टॉपेज की आवश्यकता

हाजराफॉल और कचारगढ़ के पास सालेकसा-दरेकसा रेलवे स्टेशन स्थित है, लेकिन यहां केवल पैसेंजर ट्रेनें ही रुकती हैं। इस कारण दूरदराज से आने वाले पर्यटकों को यहां पहुंचने में कठिनाई होती है। दरेकसा–सालेकसा रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज आवश्यक है।

इसके अलावा, यहां होटल और ठहरने की समुचित व्यवस्था नहीं है। पर्यटकों के ठहराव और सुविधाओं के लिए अच्छे होटल, उपहारगृह और विश्रामगृह विकसित किए जाने की आवश्यकता है, ताकि वे यहां अधिक समय बिताकर पर्यटन का भरपूर आनंद ले सकें।

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