

Rural Women Employment: गोंदिया जिले में स्वयं सहायता समूहों ने हजारों ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खोली है। बेरोजगार महिलाओं को संगठित कर बनाए गए इन समूहों के माध्यम से करीब 89 हजार महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि, उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी बाजार और उचित मंच उपलब्ध नहीं होने से उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले की आठ तहसीलों के 416 गांवों में 7,256 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इनमें से सैकड़ों समूहों को विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 488।80 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। इस आर्थिक सहायता के बल पर महिलाओं ने बकरी पालन, डेयरी व्यवसाय, पोल्ट्री फार्म, अगरबत्ती और मोमबत्ती निर्माण, आलू उत्पादन सहित कई छोटे उद्योग शुरू किए हैं। देवरी और सड़क अर्जुनी तहसीलों में 15 से 20 स्वयं सहायता समूहों ने मिलकर सामूहिक बकरी पालन केंद्र स्थापित किए हैं। यहां बकरियों की देखभाल करने वाली महिलाओं को मजदूरी दी जाती है और उन्हें 'पशु सखी' के रूप में पहचान मिली है। जिले में कई समूहों ने अपनी दूध डेयरियां भी शुरू की हैं।
महिलाओं ने आर्थिक उन्नति के लिए संयुक्त समूह बनाकर बड़े ऋण का लाभ उठाया है। उन्हें मुद्रा योजना का भी फायदा मिल रहा है। वर्तमान में समूहों की महिलाएं खेती, मुर्गी पालन, पोस्टल सेवा, बकरी, सूअर एवं मछली पालन, डेयरी फार्मिंग, दाल एवं मसाला प्रसंस्करण, पापड़ उद्योग, किराना दुकान, ज्वेलरी निर्माण, रसवंती गृह, रेस्टोरेंट, सब्जी विक्रय और ट्रेडिंग जैसे व्यवसाय संचालित कर रही हैं।
देवरी तहसील के सात गांवों में ज्वेलरी निर्माण का कार्य लाखों रुपये का कारोबार कर रहा है। बावजूद इसके, उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी बाजार नहीं होने से महिलाओं को मेलों और विभिन्न कार्यक्रमों पर निर्भर रहना पड़ता है। महिलाओं का मानना है कि यदि उन्हें विपणन की बेहतर सुविधा मिले, तो उनकी आर्थिक प्रगति को और गति मिल सकती है।