विकास से पिछड़ी सालेकसा तहसील, सिंचाई परियोजनाओं के अभाव में किसान परेशान
Rural Development: गोंदिया जिले की सालेकसा तहसील विकास के कई मानकों पर पिछड़ी हुई मानी जा रही है। क्षेत्र में पिछले 30 वर्षों से कोई नया सिंचाई प्रकल्प नहीं बना।
Rural Development (सोर्सः एआय जनरेटेड फोटो-सोशल मीडिया)
Gondia Welfare Project: गोंदिया जिले की सालेकसा तहसील की 80 प्रश. आबादी की आजीविका खेती पर ही निर्भर है इसके बावजूद सरकार द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसानों की समृद्धि के लिहाज से पिछले 30 वर्ष में तहसील में एक भी नए सिंचाई प्रकल्प का निर्माण नहीं हो पाया है। आधीअधूरी नहरों की वजह से किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
विकास के दृष्टिकोण से तहसील को काफी पिछड़ा माना जाता है। यहां नदियां तहसील के लिए बेहतर जलस्त्रोत हैं। यदि बांध बनाकर इस बहते हुए जल का उपयोग किया जाए तो तहसील चिरकाल तक सुजलाम् सुफलाम् हो सकती है। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में कई प्रस्तावित प्रकल्प ठंडे बस्ते में पड़े हैं।
ट्रेनों के विलंब से यात्री परेशान
गोंदिया से चंद्रपुरबल्लारशाह मार्ग पर सभी यात्री ट्रेनें विलंब से चलने के कारण नियमित यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, ट्रेन आए दिन लेट होती है, जिससे यात्रियों को देर से घर पहुंचना पड़ता है। दिन में ट्रेनें कभी भी तय समय पर नहीं चलती। रेलवे विभाग द्वारा कोई न कोई कारण बताया जाता है। इस ओर ध्यान देने की मांग यात्रियों ने रेल विभाग से की है।
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खेती पर आधारित उद्योग संकट
किसानों का आर्थिक उत्थान साधने के लिए खेती व्यवसाय को प्रोत्साहन व गति देने शासन के माध्यम से विभिन्न उपक्रम, योजना क्रियान्वित की जाती है। लेकिन उस पर उचित क्रियान्वयन नहीं होने तथा किसानों तक नहीं पहुंचने आदि कारणों से खेती पर आधारित उद्योग संकट में है।
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आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ ही किसानों का विकास साधने के लिए खेती पूरक व्यवसाय पर जोर दिया जाता है। लेकिन मुर्गी पालन व्यवसाय, बकरी पालन, संकरित गाय व भैंसे पालन आदि खेती पूरक व्यवसाय केवल नाम के लिए रह गया है। जबकि उसमें वृध्दि करने के लिए सभी स्तर पर प्रयास होना आवश्यक है।
भारी वाहनों से यातायात बाधित
गोंदिया की शहर की सड़कें पहले से ही संकरी है। ऐसे में इन संकरी सड़कों पर अगर बड़े वाहन पहुंच जाते हैं तो जाम की स्थिति निर्माण हो ही जाती है। जिसके लिए प्रशासन की ओर से शहर के कुछ मार्गों पर बड़े वाहनों के आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। बावजूद बड़े ट्रकों को बाजार के संकरे मार्गों पर डाल दिया जाता है।
जिससे यह वाहन फंस जाते हैं और कई देर तक आवागमन प्रभावित होता है। वहीं आवागमन करने वाले अन्य छोटे वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस ओर यातायात विभाग से ध्यान देने की मांग की गई है।
