

Gondia Paddy Procurement: खरीफ सीजन में सरकारी समर्थन मूल्य केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों के लिए इस बार नियम और सख्त कर दिए गए हैं। महाराष्ट्र राज्य मार्केटिंग फेडरेशन ने धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और वास्तविक किसानों को ही सरकारी खरीदी का लाभ दिलाने के उद्देश्य से ‘फार्मर आईडी’, बैंक खाते की आधार सीडिंग और 7/12 पर ई-पीक पाहणी में फसल की पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है। इन शर्तों को पूरा नहीं करने वाले किसानों को सरकारी केंद्रों पर धान बेचने में परेशानी हो सकती है।
सरकारी धान खरीदी प्रक्रिया में होने वाली प्रशासनिक और तकनीकी दिक्कतों के साथ ही व्यापारियों अथवा गैर-किसानों द्वारा धान बेचने की संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत केवल पंजीकृत और पात्र किसानों का ही धान सरकारी खरीदी केंद्रों पर स्वीकार किया जाएगा। फेडरेशन के माध्यम से धान बेचने के इच्छुक प्रत्येक किसान के पास अधिकृत फार्मर आईडी होना जरूरी है। फार्मर आईडी के बिना खरीदी केंद्र पर किसान का पंजीयन नहीं किया जाएगा।
जिन किसानों ने अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनवाई है, उन्हें महा-ई-सेवा केंद्र अथवा कृषि विभाग के माध्यम से जल्द से जल्द आईडी बनवाने की सलाह दी गई है। धान बिक्री की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से जमा की जाएगी। इसके लिए जिस बैंक खाते में धान बिक्री की रकम जमा होनी है, उस खाते से आधार लिंक यानी आधार सीडिंग होना अनिवार्य है। आधार सीडिंग नहीं होने पर भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी अड़चन आ सकती है और किसान को धान बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी खरीदी के लिए किसान के खेत में बोई गई फसल का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन दर्ज होना जरूरी है। इसके लिए संबंधित किसान को अपनी जमीन के 7/12 उतारे पर ई-पीक पाहणी के माध्यम से खरीफ फसल की नोंद करनी होगी। ई-पीक पाहणी में धान की पंजीकरण नहीं होने पर संबंधित जमीन से प्राप्त धान उत्पादन को सरकारी रिकॉर्ड में शामिल करने में दिक्कत हो सकती है।
धान खरीदी का सीजन शुरू होने के बाद खरीदी केंद्रों पर भीड़, तकनीकी दिक्कत और दस्तावेजों में अंतर के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार तकनीकी त्रुटियों के चलते धान बिक्री की राशि बैंक खाते में जमा होने में भी देरी होती है। इन समस्याओं से बचने के लिए किसानों से फार्मर आईडी, आधार सीडिंग और ई-पीक पाहणी की प्रक्रिया समय रहते पूरी करने का आह्वान कृषि विभाग व मार्केटिंग फेडरेशन की ओर से किया गया है। प्रशासन ने किसानों से अपने सभी दस्तावेज और ऑनलाइन रिकॉर्ड समय रहते अपडेट कराने की अपील की है, ताकि खरीफ सीजन में धान बिक्री के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।