

Highlights:
गोंदिया जिले में खरीफ सीजन के लिए जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने पहले चरण में 112 धान खरीदी केंद्रों को अनुमति दी है।
शिकायतों की जांच और पिछले रबी सीजन का धान शासन के पास जमा नहीं करने के कारण 82 केंद्रों को फिलहाल अनुमति नहीं मिली है।
मंजूर केंद्रों पर धान बिक्री के लिए अब तक 550 किसान पंजीयन करा चुके हैं।
Gondia District Marketing Federation: खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों के बीच जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने पहले चरण में जिले के 112 धान खरीदी केंद्रों को मंजूरी दी है।
वहीं, शिकायतों, जांच लंबित होने और पिछले रबी सीजन का धान शासन के पास जमा नहीं करने वाले 82 केंद्रों को फिलहाल खरीदी की अनुमति नहीं दी गई है। इन केंद्रों को मंजूरी देने का निर्णय संबंधित शिकायतों की जांच पूरी होने और धान जमा किए जाने के बाद लिया जाएगा।
जिले में खरीफ और रबी सीजन के दौरान जिला मार्केटिंग फेडरेशन के कुल 194 केंद्रों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जाता है। इन केंद्रों को जिलाधिकारी और जिला मार्केटिंग फेडरेशन की मंजूरी के बाद संबंधित सहकारी संस्थाएं संचालित करती हैं। पिछले खरीफ और रबी सीजन में कुछ केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।
30 से अधिक केंद्रों द्वारा दोनों सीजन में खरीदा गया धान अब तक शासन के पास जमा नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और मार्केटिंग फेडरेशन ने संबंधित केंद्रों को मंजूरी देने पर रोक लगाई है। अधिकारियों के अनुसार, धान जमा करने और शिकायतों की जांच पूरी होने के बाद ही इन केंद्रों को अनुमति देने पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल मंजूर 112 केंद्रों पर किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब तक 550 किसान धान बिक्री के लिए पंजीयन करा चुके हैं।
शासन ने सरकारी धान खरीदी केंद्रों पर बिक्री के लिए किसानों का पंजीयन शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जिला मार्केटिंग फेडरेशन और आदिवासी विकास महामंडल को खरीफ सीजन में धान खरीदी का लक्ष्य अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में इस बार जिले में समर्थन मूल्य पर कुल कितने क्विंटल धान की खरीदी होगी, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।
शासन के निर्देशानुसार, इस वर्ष समर्थन मूल्य केंद्रों पर किसानों से प्रति हेक्टेयर 34.23 क्विंटल धान खरीदा जाएगा। इस सीमा से अधिक उत्पादन होने पर किसानों को अतिरिक्त धान निजी व्यापारियों को बेचने की नौबत आ सकती है। इसे लेकर किसानों में नाराजगी है। किसानों की मांग है कि सरकारी खरीदी की सीमा बढ़ाकर प्रति हेक्टेयर 40 क्विंटल की जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।