

Highlights:
गोरेगांव-तिरोड़ा क्षेत्र के धान किसानों के खातों में अब तक बोनस की राशि जमा नहीं हुई है।
खरीफ सीजन के सरकारी धान खरीदी केंद्र शुरू नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ी।
बढ़ती कृषि लागत के बीच किसानों को दीपावली का खर्च उठाने में परेशानी हो रही है।
Goregaon Tiroda Farmers: दीपावली का त्योहार सिर पर है, लेकिन गोरेगांव-तिरोड़ा क्षेत्र के धान उत्पादक किसानों के खातों में अब तक बोनस की राशि जमा नहीं हुई है। चुनाव के दौरान किसानों से किए गए वादों के बावजूद बोनस को लेकर सरकार की ओर से अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
वहीं, खरीफ सीजन की धान खरीदी केंद्र भी शुरू नहीं होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। बोनस और धान खरीदी को लेकर सरकार की उदासीनता से किसानों में अब आक्रोश गहराने लगा है।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, मजदूरी, सिंचाई, कीटनाशक और अन्य कृषि खर्चों ने उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया है। ऐसे में दीपावली से पहले बोनस की राशि मिलने की उम्मीद थी, ताकि परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों के कपड़े, मिठाई और अन्य त्योहार का खर्च निकाला जा सके। लेकिन त्योहार नजदीक आने के बावजूद बोनस को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं होने से किसान आर्थिक संकट में फंसे हुए हैं।
बोनस के साथ किसानों की सबसे बड़ी चिंता धान खरीदी केंद्रों के अब तक शुरू नहीं होने को लेकर है। धान कटाई का समय नजदीक आ चुका है, लेकिन खरीदी व्यवस्था को लेकर किसानों में असमंजस बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर सरकारी खरीदी केंद्र शुरू नहीं किए
गए तो उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए परेशानी उठानी पड़ेगी। मजबूरी में किसानों को निजी व्यापारियों को कम कीमत पर धान बेचने का जोखिम भी उठाना पड़ सकता है। इससे पहले ही बढ़ी हुई उत्पादन लागत से परेशान किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ सकता है।
इस संबंध में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जिला अध्यक्ष रविकांत बोपचे ने कहा कि महंगाई के इस दौर में किसानों को दी जाने वाली मात्र 5 हजार रु. की सहायता राशि बेहद अपर्याप्त है। उन्होंने कहा कि घोषित बोनस की राशि बिना किसी शर्त के तत्काल किसानों के बैंक खातों में जमा की जाए अन्यथा आंदोलन किया जाएगा।
इस संबंध में कांग्रेस नेता डॉ. विवेक मेंढे ने कहा कि यदि दीपावली से पहले बोनस की राशि खातों में जमा नहीं की गई और धान खरीदी केंद्र तत्काल शुरू नहीं किए गए, तो वे जनता के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
किसानों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर भी नाराजगी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि जब क्षेत्र का किसान बोनस और धान खरीदी जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर परेशान है, तब जनप्रतिनिधि सरकार के समक्ष मजबूती से आवाज उठाए। लेकिन इस मुद्दे पर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।