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रविवार, 1 नवंबर को जयस्तंभ चौक पर ओबीसी समाज ने जातिवार जनगणना की मांग को लेकर भव्य प्रदर्शन किया।
सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक चले आंदोलन में जिलेभर से सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और महिलाएं शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने एससी-एसटी की तरह ओबीसी समाज के लिए भी जनगणना में अलग कॉलम शामिल करने की मांग उठाई।
Gondia OBC Mahamorcha: 'ओबीसी का डेटा नहीं, तो हिस्सेदारी भी नहीं' और 'अपनी लड़ाई हमें खुद लड़नी होगी' के नारे के साथ रविवार, 1 नवंबर को गोंदिया के जयस्तंभ चौक पर ओबीसी समाज का भव्य महामोर्चा निकाला गया। सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक चले इस आंदोलन में जिलेभर से हजारों ओबीसी समाजबंधुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और महिलाओं ने उत्स्फूर्त भागीदारी की। प्रदर्शनकारियों ने जनगणना में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की तरह ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग उठाई।
आंदोलनकारियों ने सवाल किया कि जब देश में विभिन्न वर्गों की अलग-अलग गणना की जाती है, तो बड़ी आबादी वाले ओबीसी समाज की जातिवार जनगणना के लिए अलग व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है? ओबीसी संगठनों ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र कॉलम नहीं होने से समाज की वास्तविक संख्या और उसकी स्थिति का आकलन प्रभावित होगा। उन्होंने इसे अपने संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से जातिवार जनगणना की मांग पूरी करने का आग्रह किया।
मोर्चे में शामिल वक्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जंगलों में वन्यजीवों और पक्षियों तक की अलग-अलग गणना कर उनके संरक्षण की व्यवस्था की जाती है, लेकिन देश की आधी से अधिक आबादी माने जाने वाले ओबीसी समाज की जातिवार गणना को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक कई पीढ़ियां अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता के अभाव में पीछे रह गई।
समाज के अधिकारों के लिए किसी मसीहा के आने की प्रतीक्षा करने के बजाय ओबीसी समाज को खुद आगे आकर संघर्ष करना होगा। आंदोलन में सकल ओबीसी महामोर्चा के संयोजक उमेश कोराम, मनोज मेंढे, सुनील पटले, खेमेन्द्र कटरे, कैलाश भेलावे, भूमेश शेंडे, अमर वहांडे, पुष्पा खोटेले, एस. यू. वंजारी, पंकज यादव, चंद्रकुमार बहेकार, रवी अंबुले, अजाबराव रिनायत, निखिल बन्सोड, प्रकाश काकड़े, गुड्डू लिल्हारे, सुनील तरोणे, राजेश नागरीकर, गंगाधर परशुरामकर, वाई. टी. कटरे, ओम पटले, विजय फुंडे, बंटी पंचबुद्धे, मनोज शरणागत, ओम कटरे, रवी पटले, गणेश बरडे, पप्पू पटले सहित हजारों समाजबंधु शामिल हुए।
जयस्तंभ चौक से शुरू हुए महामोर्चे के दौरान 'जय ओबीसी' के गगनभेदी नारों से परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से टालमटोल की भूमिका छोड़कर ओबीसी की जातिवार जनगणना सुनिश्चित करने की मांग की। 'उठ ओबीसी राजा हो' के आह्वान ने युवाओं में उत्साह भर दिया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि ओबीसी समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य उनके अधिकारों के लिए आंदोलनकारियों ने कहा कि ओबीसी समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य उनके अधिकारों के लिए किए जाने वाले संघर्ष से जुड़ा है। महामोर्चा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ। इसके माध्यम से शासन का ध्यान जातिवार जनगणना की मांग की ओर आकर्षित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक ओबीसी की जातिवार जनगणना की मांग पूरी नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।