

Gondia Mogra Phulala Program: संत ज्ञानेश्वर महाराज ने अपने विचारों से समाज को समता, बंधुता व मानवता का संदेश दिया। हमें भी संत ज्ञानेश्वर के विचार युवाओं तक पहुंचाना होगा। नई पीढ़ी को उनके विचारों का आदर्श सामने रखकर शिक्षा व संस्कारों के माध्यम से जीवन को समृद्ध बनाना होगा। ऐसा प्रतिपादन निरूपणकार व व्याख्याता गणेश शिंदे ने सांस्कृतिक कार्य संचालनालय महाराष्ट्र राज्य की ओर से संत ज्ञानेश्वर महाराज की 750वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में गोंदिया में आयोजित मोगरा फुलला इस संगीतमय कार्यक्रम में किया।
उल्लेखनीय है कि सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार की पहल से मोगरा फुलला यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में आयोजित किया जा रहा है और श्रोताओं का इसे उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिल रहा है। इस कार्यक्रम में उपजिलाधीश विजय अवधाने, दलजीतसिंह खालसा, जयंत शुक्ला, विदर्भसाहित्य संघ के संजीव बापट, प्रकाश उमालकर आदि उपस्थित थे।मोबाइल व सोशल मीडिया का सही उपयोग करेंइस अवसर पर शिंदे ने संत ज्ञानेश्वर महाराज के जीवनकार्यों पर अध्ययनपूर्ण भाष्य किया।
ज्ञानेश्वर ने ज्ञानेश्वरी के माध्यम से सामान्य जनता के लिए अध्यात्म के द्वार खोल दिए और मातृभाषा में ज्ञान देने की परंपरा शुरू की। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं है बल्कि व्यक्तित्व विकास और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है, ऐसा उल्लेख उन्होंने किया। आर्थिक दृष्टि से सक्षम होने के लिए, समाज में सम्मान का स्थान प्राप्त करने के लिए और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए शिक्षा को अपनाना आवश्यक है। युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया का सही उपयोग करने का आह्वान किया।
समय का नियोजन, सतत अध्ययन, अच्छी पुस्तकों का पठन और संत साहित्य का अध्ययन करने से व्यक्तित्व अधिक समृद्ध होता है। संत ज्ञानेश्वर महाराज ने जातिपाति की दीवारें तोड़कर समावेशिता का संदेश दिया है और विज्ञान व तकनीक की प्रगति के साथ मूल्य आधारित शिक्षा का संयोजन आवश्यक है। ऐसे विचार भी उन्होंने इस अवसर पर व्यक्त किए। कार्यक्रम में गायिका संमिता शिंदे ने अभंग, भारुडऔर गवलणी प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बनाया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य और रसिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।