Harit Maharashtra Campaign: गोंदिया में 17 लाख पौधारोपण का लक्ष्य, पर्यटन और हरित विकास पर जोर
Harit Campaign: गोंदिया जिले को इस वर्ष 17 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। जिलाधीश डॉ. मंगेश गोंदावले ने जीआई टैगिंग के जरिए अगले पांच वर्षों तक पौधों की सुरक्षा और देखभाल करने के निर्देश दिए हैं।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडीया)
Collector Dr Mangesh Gondawale Review Meeting: गोंदिया जिले में वन संपदा बड़े पैमाने पर उपलब्ध है। इस प्राकृतिक धरोहर को और अधिक समृद्ध बनाने तथा जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने वाले विशेष पेड़ लगाकर ज्यादा से ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करने का ठोस नियोजन किया जाए। यह निर्देश जिलाधीश डॉ. मंगेश गोंदावले ने पौधारोपण के संदर्भ में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में दिए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य तय किया गया है और महाराष्ट्र को भी उसी के अनुरूप विकसित करना है। राज्य के व्यापक विकास के लिए ‘हरित महाराष्ट्र आयोग’ के तहत पूरे प्रदेश में 300 करोड़ पेड़ लगाने का महा-लक्ष्य रखा गया है। यदि यह लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो राज्य में जंगल और पेड़ों का क्षेत्रफल 33 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। इसी अभियान के तहत इस वर्ष गोंदिया जिले को 17 लाख पेड़ लगाने का जिम्मेदारी भरा लक्ष्य सौंपा गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की उपस्थिति
जिलाधीश कार्यालय के सभागृह में आयोजित इस समीक्षा बैठक में जिला परिषद के सीईओ मुरुगानंथम, उपवन संरक्षक पवन कुमार जोंग, निवासी उप जिलाधीश भैयासाहेब बेहेरे सहित सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। इनके साथ ही अदानी फाउंडेशन, नेचर केयर फाउंडेशन, वृक्षधारा फाउंडेशन, लायंस क्लब, सांस्कृतिक महिला मंडल, सावन बहेकार तथा सेवा सारस मित्र जैसी गैर-शासकीय संस्थाओं के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
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रोजी-रोटी और पर्यावरण के पूरक होंगे पौधे
जिलाधीश ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में ऐसे पेड़ लगाए जाएं जो स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल हों और नागरिकों की रोजी-रोटी के लिए भी पूरक साबित हों। इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बरगद और पीपल जैसे बड़े व दीर्घायु पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी।
अगले 20 वर्षों को ध्यान में रखकर नियोजित पद्धति से पौधारोपण का पूरा खाका तैयार किया जाएगा, जिसमें पेड़ कहां और कैसे लगाए जाएंगे, इसकी पूरी संभावित जानकारी दर्ज होगी। इससे पौधों की देखभाल और सुरक्षा करना आसान होगा। हरित महाराष्ट्र आयोग के माध्यम से इस बार सभी नए पौधों की जीआई टैगिंग (GI Tagging) की जाएगी, ताकि अगले पांच वर्ष तक उनकी वृद्धि पर नजर रखी जा सके और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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51 प्रश. वन संपदा से बढ़ेगा कार्बन क्रेडिट
गोंदिया जिले की भौगोलिक स्थिति पर बात करते हुए जिलाधीश ने कहा कि जिले में पहले से ही 51 प्रतिशत वन संपदा मौजूद है। इस प्राकृतिक खूबसूरती को और बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से पौधारोपण जरूरी है। इस अभियान से भविष्य में कार्बन क्रेडिट और ग्रीन क्रेडिट बढ़ेगा, जिसका सीधा लाभ हमारी आने वाली पीढ़ी को मिलेगा। कुदरत के चक्र को संतुलित रखने के लिए यह प्रयास आवश्यक है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर बीज और नर्सरी तैयार करके आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है।
