

Highlights:
धापेवाड़ा सिंचाई परियोजना के चरण-1 के अंतिम छोर पर बसे गांवों तक पानी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं।
चांदोरी बुजुर्ग, सोनोली, बिरोली और घाटकुरोडा में सिंचाई के अभाव में धान की फसल को नुकसान पहुंच रहा है।
किसान अपनी जेब से खर्च कर पानी के टैंकर मंगवा रहे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।
Gondia Irrigation Water Crisis: धापेवाड़ा सिंचाई परियोजना के चरण-1 के अंतिम छोर पर बसे गांवों में सिंचाई का पानी नहीं पहुंचने से किसान गंभीर संकट में घिर गए हैं। चांदोरी बुज., सोनोली, बिरोली और घाटकुरोडा क्षेत्र में पानी के अभाव में धान की फसल सूख रही है। फसल बचाने के लिए किसानों को निजी खर्च पर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। सिंचाई व्यवस्था को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है।
उनका आरोप है कि परियोजना के अधिकारियों की उदासीनता के कारण हजारों एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई का संकट पैदा हो गया है। धापेवाड़ा सिंचाई परियोजना से अंतिम छोर के गांवों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था निर्धारित है। फसल को पानी की सबसे अधिक जरूरत के समय नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक नियोजन की कमी और अव्यवस्थित वितरण के कारण धान की फसल को नुकसान पहुंच रहा है।
समय पर पानी नहीं मिला तो पूरे साल की मेहनत बर्बाद होने की आशंका है। पहले से ही सूखे जैसी स्थिति, धान के उचित बाजार भाव की कमी और रासायनिक खादों की बढ़ती कीमतों से किसान आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ उत्पादन से होने वाली आय पर भी संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने धापेवाड़ा सिंचाई परियोजना के अधिकारियों से तत्काल पानी उपलब्ध कराने, अंतिम छोर के गांवों तक नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने और नुकसान की भरपाई करने की मांग की है।
किसान गुड्डू सोनवने ने कहा कि वसूली के लिए रोजाना तकादा करते हैं, लेकिन समय धापेवाड़ा परियोजना के अधिकारी पानी के बिल की पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं कराते। कार्यालय के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, फिर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, मेरे पास 10 एकड़ खेती है। पानी की कमी के कारण टैंकर से केवल एक एकड़ में सिंचाई कर पाया हूं, जबकि 5 से 6 एकड़ की फसल पूरी तरह सूख गई है। इस नुकसान की जिम्मेदारी परियोजना के अधिकारियों को लेनी चाहिए।
किसान रितिक ठाकरे ने कहा कि पानी के लिए चापेवाड़ा परियोजना कार्यालय के चक्कर लगाकर हम थक चुके हैं, फिलहाल चार मोटरों में से केवल दो ही चालू है। पानी के लिए किसानों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है। अभी पानी सरांडी तक ही पहुंचा है। हमारा गांव नहर के अंतिम छोर पर होने के कारण खेतों तक पानी पहुंचेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। मेरी साढ़े तीन एकड़ की धान की फसल पूरी तरह सूखकर बर्बाद हो गई है। इसके लिए - परियोजना के अधिकारी जिम्मेदार है। फसल नुकसान की भरपाई नहीं की गई तो हम तीव्र आंदोलन करेंगे।