गोंदिया में बिछा कांक्रीट सड़कों का जाल, लेकिन विकास की भेंट चढ़ी हरियाली; 50 डिग्री तक तप रही हैं सड़कें
गोंदिया जिले में कांक्रीट सड़कों के विस्तार और राजमार्गों के चौड़ीकरण के लिए सैकड़ों पुराने पेड़ों की बलि दे दी गई। अब भीषण गर्मी में छांव न मिलने से सड़कें 'तवे' की तरह तप रही हैं।
Gondia News: गोंदिया जिले की सड़कों को गांवों तक जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर कांक्रीट सड़कों का जाल बिछाया गया है। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण के दौरान सैकड़ों पेड़ों की कटाई की गई। अब अप्रैल माह में बढ़ती गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दोपहर के समय शहर सहित जिले की सड़कें तवे की तरह तप रही हैं, जिससे आमजन के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
जिले का अधिकतम तापमान भले ही 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया हो, लेकिन सड़कों की सतह पर यह 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। पिछले एक दशक में गोंदिया शहर सहित जिले में कांक्रीट सड़कों का तेजी से विस्तार हुआ है। डामर की तुलना में कांक्रीट ऊष्मा को अधिक समय तक संचित रखता है, जिसके कारण दिनभर की गर्मी रात तक बनी रहती है। हरियाली में आई कमी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
गोंदिया से गोरेगांव, गोंदिया-बालाघाट तथा गोंदिया से तिरोड़ा मार्ग का निर्माण कांक्रीट सड़कों के रूप में किया गया है। इन मार्गों के निर्माण के दौरान सैकड़ों पेड़ों की कटाई हुई, जिसके कारण अब यात्रियों को छाया नहीं मिल पा रही है और उन्हें भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
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डामर की सड़कें हुईं गायब
करीब 10-15 वर्ष पहले तक शहर में डामर की सड़कें और किनारों पर छायादार पेड़ों की भरमार थी। लेकिन सड़क चौड़ीकरण और कांक्रीटीकरण के चलते आम, नीम, पीपल और बरगद जैसे बड़े पेड़ों की कटाई कर दी गई। परिणामस्वरूप अब शहर का स्वरूप कांक्रीट के जंगल जैसा हो गया है, जहां दूर-दूर तक छांव का अभाव है।
सिग्नल पर भी नहीं राहत
यातायात संकेतों पर रुकने के दौरान वाहन चालकों को तेज धूप में खड़ा रहना पड़ता है। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें करीब 60 सेकंड तक बिना छाया के इंतजार करना पड़ता है।
हरियाली व छायादार मार्गों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहरी नियोजन में हरियाली और छायादार मार्गों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो भविष्य में कांक्रीट की सड़कें आमजन के लिए गंभीर समस्या बन सकती हैं। प्रशासन को सड़क निर्माण के साथ-साथ पौधारोपण और छाया की व्यवस्था पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
50-60 वर्ष पुराने पेड़ों की कटाई
गोंदिया से बालाघाट राष्ट्रीय मार्ग के चौड़ीकरण के दौरान इस मार्ग को रावणवाड़ी तक कांक्रीट सड़क में परिवर्तित किया गया। साथ ही इस मार्ग पर स्थित 50-60 वर्ष पुराने पेड़ों की कटाई कर दी गई। अब इस मार्ग पर एक भी छायादार पेड़ दिखाई नहीं देता, जिससे यात्रियों, विशेषकर मोटरसाइकिल चालकों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
उदाराम कवास, काटीबघोली
